Home >>> सोनभद्र / सिंगरौली >>> *हिंडाल्को इंडस्ट्रीज रेनुसागर के श्रमिकों ने दिपावली के दिन भी मोहर्रम जैसे मातम मनाने को मजबूर ,,,!* *उर्जान्चल के पत्रकरो को श्रमिको ने कहा पहनले चूड़ियां ,,,!* *पढ़े,के सी शर्मा की एक विशेष रिपोर्ट,* *हकीकत के आईने में,,,!*

*हिंडाल्को इंडस्ट्रीज रेनुसागर के श्रमिकों ने दिपावली के दिन भी मोहर्रम जैसे मातम मनाने को मजबूर ,,,!* *उर्जान्चल के पत्रकरो को श्रमिको ने कहा पहनले चूड़ियां ,,,!* *पढ़े,के सी शर्मा की एक विशेष रिपोर्ट,* *हकीकत के आईने में,,,!*

*हिंडाल्को इंडस्ट्रीज रेनुसागर के श्रमिकों ने दिपावली के दिन भी मोहर्रम जैसे मातम मनाने को मजबूर ,,,!*

*उर्जान्चल के पत्रकरो को श्रमिको ने कहा पहनले चूड़ियां ,,,!*

*पढ़े,के सी शर्मा की एक विशेष रिपोर्ट,*
*हकीकत के आईने में,,,!*

*रेनुसागर।सोनभद्र।*

अनपरा थाना अंतर्गत बिड़ला की हिंडालको पावर डिवीजन कंपनी रेनुसागर में मजदूरों का आंदोलन लगातार जारी है।

आंदोलनरत श्रमिको और स्थानीय लोगो ने बताया कि संविदा श्रमिको का पूरा परिवार कल दिपावली नही मनाए, बल्कि श्रमिको का पूरा परिवार मोहर्रम जैसे मातम मनाने को मजबूर था ।
कम्पनी प्रबन्धन की बेरुखी से परेसान ये श्रमिक कम्पनी के तरफ से वटने वाला मीठा भी ग्रहण नही किये।
इनके यहा मोहर्रम की तरह मातम की दीपावली रही ।
कैजुअल वाले श्रमिको ने कहा कि जब से श्रमिको का आंदोलन चल रहा है तब से यहा उर्जान्चल का कोई पत्रकार झांकने तक नही आया और न ही संगठन द्वारा प्रेषित प्रेस विज्ञपत्ति को ही प्रकाषित किया । चंद सिक्को पर अपनी जमीर बेचने वाले पत्रकारो को धिक्कार है ।श्रमिक कल से चूड़ियां बाट कर कहेगा कि यहा के पत्रकार पहन लें चिड़िया ।जिस पर उर्जान्चल के एक प्रमुख पत्रकार ने हमे अपनी दुखे मन से भेजी प्रतिक्रिया में यहाँ तक लिख दिया है कि क्या करूँ विवसता ने—-? स्थिति यह बना दी है कि,
*लगता है जीते जी मर जाऊ*!
उन्होंने आगे लिखा कि सिर्फ साल भर में 5000 कूल लाभ पता हूँ ,सब जोड़ कर।पर—-?
यह प्रतिक्रिया पढ़ मुझे यहा के पत्रकारों की स्थिति और उनकी विवसता सहज ही समझ मे आगयी ,पर मैं स्वयं को मर्माहत होने से अपने को रोक नही सका।बरबस ही उस पत्रकार की पीड़ा को इस स्टोरी के रूप में उकेरने को मजबूर हो गए ।

ज्ञात हो कि भारतीय मजदूर संघ के बैनर तले पिछले 1 नवंबर से शुरू हुआ आंदोलन दीपावली के बाद भी जारी है।
अपनी 11 सूत्री मांगों को लेकर रेनू सागर पावर परियोजना के मजदूरों ने भारतीय मजदूर संघ के बैनर तले रेनू सागर पावर प्लांट के दो नंबर गेट पर 1 नवंबर से लगातार धरना दिए हुए हैं ।

धरने को देखते हुए चट्टी चौराहे व आम लोगो में यह आंदोलन चर्चा का विषय बना हुआ है।

लेकिन इस निजी पावर कंपनी के प्रबंधन या कम्पनी के उच्चाधिकारियों के कानों में दीपावली के इस पर्व पर मोहर्रम जैसे मातम मनाने को मजबूर किये गए श्रमिको की पीड़ा दीपावली के बाद भी आज भी जस की तस बनी हुई है । न जाने क्यो प्रबन्धन टस से मस होने को तैयार नही है, जबकि आंदोलनरत संगठन संघ का ही श्रमिक संघ है, जिसकी केंद्र व प्रदेश में सरकार है।फिर भी निजी कम्पनी के प्रवंधन की मनमानी लगातार जारी है और जिला प्रसाशन कान में तेल डाल हाथ पर हाथ रखे हुए आँख मूँदे चुप चाप बैठा हुआ है।जो पाठकों को सहज ही अंदाजा लग गया होगा कि बिड़ला की इस निजी कम्पनी का सत्ता में इनकी जड़े कितनी गहरी और मजबूत है।
यही कारण है कि इन श्रमिको के घरों में दीपावली पर भी अंधेरा छाया रहा और इनका परिवार मोहर्रम जैसे मातम
मनाने को अपने सीने पर पत्थल रख मजबूर थे।
चारो तरफ रोशनी से जगमगाते उर्जान्चल के इस पावर हब में मजदूरो के घरों में अंधेरा छाया रहा। रोशनी जगमगाहट इन बेचारों को उन्हें मुँह
चिढ़ाती जैसे लग रही थी।

वही जहां सबके घरों में मिठाई व तरह -तरह के पकवान बने तो इन श्रमिको ने हो रहे शोषण के विरोध में अपने घरों के चूल्हे को न जलाने का निर्णय ले सब की आत्मा की झिकझोर के रख दिया है ।
इन बेचारों के बच्चो सहित पूरे परिवार का इस पर्व पर मुर्झाया चेहरा इन्हें सीने पर मूंग की “दाल दलने” जैसे प्रतीत हो रहीथी। जिसका पीड़ा आज कम्पनी प्रवंधन,जिला प्रसाशन,शासन सहित पत्रकरो पर भी उनकी अनदेखी करने
पर असन्तोष और आक्रोश के रूप में प्रस्फुटित हो गया और इन्होंने पत्रकरो की आत्मा को चूड़ी पहनने की बात कह झिकझोर दिया ,तभी तो एक
वरिष्ठ पत्रकार की अंतरात्मा हिल उठी और उन्हें उनकी अन्तरात्मा की आवाज अभिव्यक्त करने को मजबूर कर दिया ।
अब सवाल उठता है कि क्या दीपावली जैसे त्योहार के अवसर बीतने के बाद भी आंदोलनरत कम्पनी के श्रमिकों की पीड़ा और उनकी समस्याए प्रबन्धन को नजर नही आरही है ?
यदि आरही है तो वे इसे नजर अंदाज क्यो किए हुए हैं ?
यह एक विचारणीय यक्ष प्रश्न अवश्य खड़ा हो चुका है ।

प्रबन्धन की इस बेरुखी से मजदूर संघ और श्रमिको में भारी अश्न्तोष और आक्रोश उतपन्न हो चुका है,
जो औद्योगिक शांति के लिए तो फिलहाल ठीक नही ही कहा जासकता है।
प्रबन्धन के इस उपेक्षात्मक रुख से दीपावली के इस पर्व पर कम्पनी के सैकड़ों मजदूरों के घरों में अंधेरा छाया हुआ था और उनके घरों में चूल्हे नही जले।
जो मानवीय दृष्टिकोण से तो एकदम सही नही कहा जासकता है।
कम्पनी प्रबन्धन का इस तरह निष्ठुर रवैयाऔर बेरुखापन इस आंदोलन में कही अब आग में घी डालनेवाला आने वाले दिनों में सावित न हो जाये कि सम्भावना से इनकार भी नही किया जा सकता है।

मजदूरों ने प्रबन्धन के उक्त रवैये से क्षुब्ध होकर यह चेतावनी भी दे दी है कि यदि प्रबंधन की यही हठधर्मिता आगे भी बरक़रार रहती है और हमारी मांगो को गम्भीरता से नही लिया जाता है, तो हम आंदोलनरत मजदूर आत्मदाह करने का भी निर्णय लेने से नही कतराने वाले हैं।हम आत्मदाह भी करने के लिए तैयार है।
श्रमिको ने जिला प्रशासन व कम्पनी प्रवंधन व सम्बन्धित उच्चधिकारियों का इस
ओर ध्यान आकृष्ट कराते हुए शीघ्र स्वयं के हस्तक्षेप कर समस्याओ का समाधान समय रहते निकालने का आग्रह किया है ।

*आंदोलनरत श्रमिको की यह है मुख्य मांगे*!

1- समान कार्य का समान वेतन दिया जाए।2- ईएसआई कटौती के बावजूद मेडिकल सुविधा उपलब्ध होना, यदि सुविधा शीघ्र उपलब्ध न हो तो सुविधा उपलब्ध होने तक कटौती रोक दी जाए एवं सभी संविदा श्रमिकों को रेनुसागर के अस्पताल में ओपीडी एवं आकस्मिक मेडिकल की सुविधा उपलब्ध कराया जाये।3- सभी संविदा श्रमिकों को 9 होलीडे दिया जाये।4- सभी संविदा श्रमिकों को ग्रेडसन दिया जाए।5- सभी संविदा श्रमिकों को नाइट एलांउस, हाइट एलाउंस, साइकिल एलाउंस, क्वार्टर एलाउंस एवं जगन एलाउंस दिया जाए ।6- सभी रिटायर्ड संविदा श्रमिकों को भारत सरकार के नियमानुसार ग्रेजुएटी का भुगतान किया जाए।7- प्रबंधक के द्वारा संविदा श्रमिकों के वार्षिक मेडिकल चेकअप के साथ प्रबंधक के द्वारा चिकित्सा उपलब्ध कराया जाये।8- सभी संविदा श्रमिकों को 26 दिन की हाजिरी का भुगतान सुनिश्चित किया जाये।9- सीनियारीटी के आधार पर सभी संविदा श्रमिकों को स्थाई किया जाये ।10- पिछले समझौते को शत प्रतिशत लागू किया जाये ।11- कैंटीन के खाने और नाश्ते के बढ़ने वाले रेट को स्थगित किया जाये आदि है।

भारतीय मजदूर संघ के संयोजक कुलदीप पाल ने बतय्या है कि मजदूरों की मांगों के सम्बंध में पत्र भेज , कम्पनी व जिला प्रशासन के उच्च अधिकारियों को अवगत कराते हुए उसके शीघ्र समाधान की अपेक्षा संगठन ने किया है।
परन्तु अभी तक प्रबन्धन और प्रशासन की ओर से कोई सकारात्मक पहल नही की गई है ।उन्होंने स्पष्ट रूप से चेताया हैं कि दीपावली पर्व के बीतने के बाद आंदोलन को और तीव्र गति दी जाएगी।
यदि इस दौरान आंदोलन उग्र होता है तो इसके लिए कम्पनी प्रबन्धन जिम्मेदार होगा।
क्यो की कम्पनी प्रबन्धन के उपेक्षात्मक रुख से श्रमिको में भारी असन्तोष और आक्रोश व्याप्त है ।
मजदूर संघ व श्रमिको ने सोनभद्र जिलाधिकारी, व पुलिस अधीक्षक , तथा कम्पनी के उच्चधिकारियों का इस ओर ध्यान आकृष्ट कराते हुए उनके स्वयं के हस्तक्षेप की मांग करते हुए समय रहते आवश्यक पहल करने का आग्रह किया है ।जिससे औद्योगिक शांति बनी रहे।

*देखना है इस आंदोलन का और जिला प्रशासन तथा कम्पनी प्रबन्धन का आगे क्या रुख होता हैं?*,
*जिस पर सबकी नजरें टिकी हुई है?*

अन्य अपडेट लगातार पाने के लिए हमारा फेसबुक पेज लाइक करें| आप हमें ट्वीटर पर भी फॉलो कर सकते हैं| आप हमारा एंड्राइड ऐप भी डाउनलोड कर सकते है|

loading...

Check Also

*:-देर रात दर्ज हो सकता है मुकदमा ?* *:-निर्दोष को न फसाने की उर्जान्चल जन कल्याण समति ने डीएम, एसपी,से लगाई गुहार।* *भाजपा नेता के साथ हुए पुलिसिया बर्बरता से भाजपाई है आक्रोशित,,,!* *!!रिपोर्ट के सी शर्मा!!*

*:-देर रात दर्ज हो सकता है मुकदमा ?* *:-निर्दोष को न फसाने की उर्जान्चल जन …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Social Media Auto Publish Powered By : XYZScripts.com