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स्वामी विवेकानंद की 156वीं जयंती पर दूता परिवार उन्हें शत शत नमन करता है

स्वामी विवेकानंद की 156वीं जयंती पर दूता परिवार उन्हें शत शत नमन करता है

*हम वो हैं जिसे हमारी सोच ने बनाया है,

इसलिए इस बात का धयान रखिये कि आप क्या सोचते हैं।

शब्द गौण हैं, विचार रहते हैं, वो दूर तक यात्रा करते हैं।*

देश के महानायक रहे स्वामी विवेकानंद के ये वचन आज भी लोगों को नई सीख देते हैं। आज स्वामी विवेकानंद की 156वीं जयंती है। 12 जनवरी 1863 को कलकत्ता के कायस्‍थ परिवार में जन्मे नरेंद्रनाथ दत्त के पिता व‍िश्‍वनाथ दत्त कलकत्ता हाईकोर्ट के वकील थे और मां भुवनेश्वरी देवी धार्मिक विचारों वाली महिला थीं।

सन् 1871 में नरेंद्रनाथ आठ साल की उम्र में स्कूल गये। 1879 में उन्‍होंने प्रेसीडेंसी कॉलेज की प्रवेश परीक्षा में पहला स्‍थान हास‍िल क‍िया। 1881 में कलकत्ता के दक्षिणेश्वर के काली मंदिर में नरेंद्रनाथ दत्त की मुलाकात रामकृष्‍ण परमहंस से हुई। 25 साल की उम्र में नरेंद्रनाथ दत्त घर छोड़कर संन्यासी बन गये थे। इन्हीं नरेंद्रनाथ ने आगे चलकर विश्व प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु स्‍वामी विवेकानंद के रूप में अपनी पहचान बनायी।

1893 में अमेरिका के शिकागो में हुई विश्व धर्म परिषद में स्वामी विवेकानंद भारत के प्रतिनिधि के रूप से पहुंचे थे। यहां स्वामी विवेकानंद को बोलने के लिए थोड़ा समय मिला।
इस भाषण में दुनिया भर से अलग-अलग धर्मों के विद्वानों के सामने इन्होंने वेदांत का ऐसा ज्ञान दिया कि पूरा संसद तालियों से गूंज उठा और भारतवासियों का सिर गर्व से ऊंचा उठ गया।

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