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चित्रकूट कोटेदार की मनमानी ग्रामीणों पर पड़ रही भारी

*यहाँ तो चलती है कोटेदार की मनमानी*

*कोटेदार की मनमानी ग्रामीणों पर पड़ रही भारी*

चित्रकूट। जिले में सरकारी राशन वितरण प्रणाली को भ्रष्टाचार का घुन लग गया है। जिसमें भ्रष्टाचार की जड़े इतनी गहरी हो गयी हैं कि इन्हें जड़ से खत्म करने में कड़ी मशक्कत करनी पडे़गी। शासन जहाँ कोटेदार राशन वितरण में जमकर घटतौली कर रहे हैं। ऐसे में राशनकार्ड धारकों के विरोध करने पर कोटेदार अभद्रता करने पर उतारू हो जाते है। ऐसा ही एक मामला पहाड़ी ब्लाक के चकजाफ़र माफी गाँव में देखने को मिला। जहाँ गांँव के दबंग कोटेदार का ससुर अपनी मनमानी करने से बाज नहीं आता है।

कोटेदार श्रीमति राजरानी का ससुर बीते कई वर्ष से गांव में कोटेदारी कर रहा है। जिसको घटतौली व धाँधली करने में महारथ हांसिल है। अगर कभी ग्रामीणों की शिकायत पर कोई अधिकारी जांच करता है तो दबंग कोटेदार जांच अधिकारी को भी किसी भी तरह अपने पक्ष में कर लेता है।जिस पर किसी प्रकार की कोई कार्यवाही नही होती है। चकजाफ़र माफी गाँव के कार्ड धारकों का आरोप है कि कोटेदार अन्तोदय कार्ड धारकों को सौ रूपये लेकर महज 28 किलो राशन देता है। जबकि पात्र गृहस्थी कार्डधारकां प्रति यूनिट सिर्फ चार किलो राशन मिलता है। जबकि 5 किलो राशन की कीमत वसूली जाती है।
जिसमें कुछ खास व रसूखदार कार्डधारकों को गुपचुप तरीके से राशन कोटेदार द्वारा दे दिया जाता है। कोटेदार गरीब ग्रामीणों को बायोमैट्रिक के नाम पर हप्तों सुबह-शाम टहलाता है ,हप्तों बीत जाने के बाद अन्त्योदयकार्ड धारकों से प्रति कार्ड 5 किलो गल्ला काट लिया जाता है । जबकि बीपीएल कार्ड धारकों से प्रति यूनिट एक किलो गल्ला कोटेदार अपनी दबंगई के बल पर ग्रामीणों से काट कर देता है ,कुछ ग्रामीणों ने बताया इसका विरोध करने पर धमकी भी दी जाती है जो इतना मिल रहा है उसे लेलो वरना इतना भी नही मिलेगा तब क्या करोगे ..? ग्रामीणों ने बताया गल्ला लेने के बाद यदि रिसिविंग मांगा जाए तब रिसिविंग नही देता है बल्कि रिसिविंग बायोमैट्रिक मशीन से निकाल कर फाड़ दी जाती है । कोटेदार ने बताया है कि सप्लाई इंस्पेक्टर ने बताया है कि हम किसी का भी एक दो यूनिट का गल्ला कम कर सकते हैं ,और उसका गल्ला काट कर अपने पास रख सकते हैं।

ग्रामीणों का यह आरोप भी है कि कोटेदार जिस कम्प्यूटर कांटे से गल्ला तौल कर देता है। उस कांटे में भी बड़ा झोल है जिसमें प्रति पांच किलो पर एक किलों राशन कम मिलता है। कार्डधारकों का कहना है कि अगर कोई ग्रामीण कोटेदार की शिकायत करता है तो कोटेदार शिकायत करने वाले कार्डधारको को राशन भी नहीं देता है और यदि देगा तब उसके साथ अभद्रता भी करता है।

लेकिन वही पास के गांव चकौंध में किसी भी ग्रामीण को कोटेदार के प्रति कोई शिकायत नही है ,बल्कि समय से बायोमैट्रिक मशीन काम करती है ,और सभी ग्रामीणों को बराबर गल्ला दिया जाता है ।

*रिपोर्ट-ठा0 सुरेन्द्र सिंह कछवाह जन्मप्रसारण टाइम्स ब्यूरो चीफ चित्रकूट*

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