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बीजेपी ने 101 सीटों पर चुनाव लड़कर जीतीं 89 सीटें, जानें 2020 के मुकाबले कैसा रहा पार्टी का स्ट्राइक रेट

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पटना: बिहार के सियासी मैदान में अगर क्रिकेट की भाषा इस्तेमाल करें, तो NDA ने इस बार ‘सेंचुरी’ नहीं, बल्कि ‘डबल सेंचुरी’ मार दी। 14 नवंबर 2025 को आए बिहार विधानसभा चुनावों के नतीजों ने एक बार फिर साबित कर दिया कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन का जलवा बरकरार है। कुल 243 सीटों वाली इस सभा में NDA ने 202 सीटें जीतकर भारी बहुमत हासिल किया, जबकि महागठबंधन को सिर्फ 35 सीटें नसीब हुईं। NDA की इस जीत में सबसे बड़ा योगदान बीजेपी का रहा, जिसने कुल मिलाकर 89 सीटों पर जीत दर्ज की। 2020 से तुलना करें तो बीजेपी ने न सिर्फ अपनी सीटों में इजाफा किया, बल्कि स्ट्राइक रेट (यानी लड़ी गई सीटों पर जीत का प्रतिशत) भी शानदार रखा।

88.1 के स्ट्राइक रेट से 89 ‘रन’

बता दें कि बीजेपी ने 2020 के विधानसभा चुनावों में 110 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे और 74 सीटों पर जीत दर्ज की थी। वहीं, इस बार पार्टी ने 101 सीटों पर उम्मीदवार उतारे और 89 सीटों पर कब्जा किया। कई सीटें ऐसी रहीं जहां बीजेपी के उम्मीदवार एक हजार से भी कम वोटों के अंतर से हारे, वरना यह आंकड़ा और बेहतर हो सकता था। इस तरह देखा जाए तो जहां 2020 के चुनावों में बीजेपी ने 67.3 फीसदी के स्ट्राइक रेट से 110 में से 74 सीटें जीती थीं, वहीं इस बार पार्टी को 101 सीटों में से 89 पर जीत मिली और स्ट्राइक रेट 88.1 फीसदी रहा। इस तरह देखा जाए तो पिछले 5 सालों में बीजेपी ने अपने प्रदर्शन में जबरदस्त सुधार किया।

NDA में सबसे आगे रही बीजेपी

पूरे NDA की बात करें तो भी बीजेपी का स्ट्राइक रेट सबसे अच्छा रहा। गठबंधन में दूसरे नंबर पर जेडीयू रही जिसने 101 सीटों पर चुनाव लड़कर 85 सीटें हासिल की और उसका स्ट्राइक रेट 84.16 रहा। वहीं, चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) ने 28 सीटों पर चुनाव लड़ा, और 67.86 के स्ट्राइक रेट से 19 सीटें जीतीं। केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी की पार्टी हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा ने 6 सीटों पर चुनाव लड़कर 5 सीटें हासिल कीं और उसका स्ट्राइक रेट 83.33 फीसदी रहा। इसके अलावा उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक मोर्चा ने 66.67 के स्ट्राइक रेट से 6 में से 4 सीटें जीतीं। इस तरह देखा जाए तो गठबंधन में 88.1 फीसदी के स्ट्राइक रेट के साथ BJP सबसे आगे रही।

बीजेपी की प्रचंड जीत का राज

इस शानदार जीत के कई कारण गिनाए जा सकते हैं लेकिन उनमें सबसे ऊपर संगठन की ताकत है। बीजेपी ने बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं को जुटाया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व गृह मंत्री अमित शाह की रैलियों ने जोश भरा। बीजेपी ने पारंपरिक सीटों के अलावा उन इलाकों में भी पैठ बनाई, जहां पहले चुनौती ज्यादा थी। मसलन, मुस्लिम बहुल इलाकों में भी पार्टी ने कुछ सीटें छीनीं, जो 2020 में महागठबंधन का गढ़ रहे थे। दूसरा, बीजेपी को इस बार गठबंधन के साथियों का भी अच्छा साथ मिला और माना जा रहा है कि घटक दल एक दूसरे को अपने वोट अच्छी तरह ट्रांसफर करा पाए। कुल मिलाकर, एनडीए का स्ट्राइक रेट 83% से ऊपर रहा, जो कि शानदार है।

विपक्ष का हुआ बेहद बुरा हाल

वहीं, दूसरी तरफ विपक्ष की कहानी उल्टी है। आरजेडी ने 143 सीटों पर लड़ा, लेकिन सिर्फ 25 जीतीं। कांग्रेस का हाल तो और बुरा रहा, उसे 61 सीटों पर सिर्फ 6 मिलीं, यानी कि स्ट्राइक रेट 10 फीसदी से भी कम रहा। प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी ने सभी 243 पर लड़ा, लेकिन एक भी नहीं जीत पाई। माना जा रहा है कि जन सुराज ने अलग-अलग सीटों पर NDA और महागठबंधन के उम्मीदवारों के वोट काटे। AIMIM ने कुल मिलाकर 25 सीटों पर चुनाव लड़कर 5 सीटें जीतीं, और कह सकते हैं कि विपक्षी दलों में उसका स्ट्राइक रेट सबसे अच्छा रहा।

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