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जन मानस रमेन्द्र पाण्डेय ‘ व्रह्म्योगर्षि ‘

महाभारत में आठ गुणों से युक्त व्यक्ति को आर्य माना गया है :- शान्त: तितिक्षु: दान्तश्च, सत्यवादी जितेन्द्रियः। दाता दयालु: नम्रश्च, आर्यस्यादष्टभिर्गुणै ।। काल सूत्र में स्वामी महाबीर को बार-बार आर्य कहकर संबोधित किया गया है । गौतम बुद्ध ने चार आर्य सत्य बताये हैं। जिनको मानकर सच्चे मार्ग को …

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जन मानस रमेन्द्र पाण्डेय ‘ व्रह्म्योगर्षि ‘

सनातन वैदिक काल में विद्यालय वटुसमूह के अध्ययन से गूंजे रहते थे ।यज्ञ विद्या पर व्याख्यान होते थे। धर्मशास्त्रों की चर्चाओं के दौरान उनकी खुलकर आलोचनाएं तक होती थीं । पुस्तकें पढ़ी जाती थीं ‘, सभी शास्त्रों के अर्थ का विचार होता था। कुछ मुनि वहीं पर योगाभ्यास भी करते …

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विवेक क्रान्ति रमेन्द्र पाण्डेय ‘ व्रह्म्योगर्षि ‘

सृष्टि की उत्पत्ति एवं विकास के क्रम में मानव सभ्यता के उदय काल के ज्ञान वेद कहे जाते हैं। ऋग्वेद मूल है, इसमें ऋचाओं का संग्रह है, छन्दोबद्ध मंत्र ऋक् या ऋचा हैं। इस काल में सूर्य की महत्ता वर्णित है, चेतन रश्मियों को देव कहा जाता है। यजुर्वेद में …

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जन मानस रमेन्द्र पाण्डेय ‘ व्रह्म्योगर्षि ‘

वैदिक काल में आश्रमों के विद्यालयों को राजकीय सहायता की आवश्यकता नहीं होती थी ।वहां के कुलपति राज्याश्रय लेना भी नहीं चाहते थे ।विद्यालयों की शिक्षा को विधि-विधान (कानून) से बांधना उसकी स्वच्छन्दता में बालक मानते थे। इसीलिये विद्वान का पद सर्वोच्च माना जाता था और राज्य शासन उसके मार्ग …

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जन मानस रमेन्द्र पाण्डेय ‘ व्रह्म्योगर्षि ‘

वैदिक काल में आश्रमों के विद्यालयों को राजकीय सहायता की आवश्यकता नहीं होती थी ।वहां के कुलपति राज्याश्रय लेना भी नहीं चाहते थे ।विद्यालयों की शिक्षा को विधि-विधान (कानून) से बांधना उसकी स्वच्छन्दता में बालक मानते थे। इसीलिये विद्वान का पद सर्वोच्च माना जाता था और राज्य शासन उसके मार्ग …

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विवेक क्रान्ति रमेन्द्र पाण्डेय ‘ व्रह्म्योगर्षि ‘

वाणी, विचार एवं कर्म का सामंजस्य जरूरी है। स्वार्थ प्रधान मानसिकता तथा स्वहित की संकीर्ण प्रवृत्ति से आंतरिक अशांति, अस्थिरता व असुरक्षा आती है । अन्तर्मन के भाव और विचार प्रभावी होते हैं तथा सभ्यता, शिष्टाचार एवं नैतिक शिक्षा लोक हितैषी होती है। शुद्ध हृदय प्रकाश देता है । निर्मल …

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नवरात्र के सातवें दिन मां दुर्गा के कालरात्रि रूप की पूजा की जाती है. शास्‍त्रों के अनुसार बुरी शक्तियों से पृथ्‍वी को बचाने और पाप को फैलने से रोकने के लिए मां ने अपने तेज से इस रूप को उत्‍पन्‍न किया था. !!रिपोर्ट के सी शर्मा!!

मां कालरात्रि दुर्गा जी का सातवां स्वरूप मां कालरात्रि है. इनका रंग काला होने के कारण ही इन्हें कालरात्रि कहा गया और असुरों के राजा रक्तबीज का वध करने के लिए देवी दुर्गा ने अपने तेज से इन्हें उत्पन्न किया था. इनकी पूजा शुभ फलदायी होने के कारण इन्हें ‘शुभंकारी’ …

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माँ जवालामुखी शक्तिपीठ में शारदीय नवरात्र पर भक्तों के लिए की गई  है विशेष व्यवस्था यहा नीम के पेड़ की पूजा के बाद ही देवी की पूजा  मानी जाती हैं पूर्ण, पढ़े,के सी शर्मा की विशेष रिपोर्ट

शक्तिनगर । यूं तो देश-प्रदेश में कई मंदिर हैं जहां मां शक्ति की पूजा की जाती है । जनपद सोनभद्र के दक्षिणी छोर पर स्थित शक्तिनगर में ज्वाला देवी के मंदिर भी जनपद समेत सीमावर्ती राज्यों के लिए विशेष महत्व रखता है । इस शक्तिपीठ मंदिर में लोगों की आस्था …

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!!के सी शर्मा !! ज्वालादेवी मन्दिर जहां कई प्रान्तों से आते हैं भक्त , होती हैं मन्नते पूरी,

शक्तिनगर । यूं तो देश-प्रदेश में कई मंदिर हैं जहां मां शक्ति की पूजा की जाती है । जनपद सोनभद्र के दक्षिणी छोर पर स्थित शक्तिनगर में ज्वाला देवी के मंदिर भी जनपद समेत सीमावर्ती राज्यों के लिए विशेष महत्व रखता है । इस शक्तिपीठ मंदिर में लोगों की आस्था …

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जन मानस रमेन्द्र पाण्डेय ‘ व्रह्म्योगर्षि ‘

महाभारत में आठ गुणों से युक्त व्यक्ति को आर्य माना गया है :- शान्त: तितिक्षु: दान्तश्च, सत्यवादी जितेन्द्रियः। दाता दयालु: नम्रश्च, आर्यस्यादष्टभिर्गुणै ।। काल सूत्र में स्वामी महाबीर को बार-बार आर्य कहकर संबोधित किया गया है । गौतम बुद्ध ने चार आर्य सत्य बताये हैं। जिनको मानकर सच्चे मार्ग को …

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