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” सम्पूर्ण श्रीमद्भगवद्गीता ” गतांक से आगे – अध्याय अष्टम : अक्षरब्रह्मयोग (भगवत्प्राप्ति) श्रीभगवानुवाच अक्षरं ब्रह्म परमं स्वभावोऽध्यात्ममुच्यते। भूतभावोद्भवकरो विसर्गः कर्मसंज्ञितः ।।3।।

भगवान् ने कहा- अविनाशी और दिव्य जीव ब्रह्म कहलाता है और उसका नित्य स्वभाव अध्यात्म या आत्म कहलाता है, जीवों के भौतिक शरीर से सम्बन्धित गतिविधि कर्म या सकाम कर्म कहलाते हैं। सज्जनों, ब्रह्म अविनाशी तथा नित्य है और इसका विधान कभी भी नहीं बदलता, किन्तु ब्रह्म से भी परे …

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सम्पूर्ण श्रीमद्भगवद्गीता ” गतांक से आगे – अध्याय अष्टम : अक्षरब्रह्मयोग (भगवत्प्राप्ति)

भाई-बहनों, सातवें अध्याय में श्लोक एक से तीन तक भगवान् ने अर्जुन को सत्यस्वरूप का तत्त्व सुनने के लिये सावधान कर उसे कहने की प्रतिज्ञा की, फिर उसे जानने वालों की प्रशंसा करके सताईवें श्लोक तक उस तत्त्व को विभिन्न तरह से समझाकर उसे जानने के कारणों को भी अच्छी …

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होलाष्टक क्या है, 23 फरवरी से 1 मार्च 2018 तक नहीं होंगे 16 शुभ कार्य

वर्ष 2018 में होलाष्टक 23 फरवरी को लगेगा और यह 1 मार्च 2018 तक रहेगा। यह 8 दिनों का होता है और इस दौरान किसी भी तरह के शुभ और मांगलिक कार्य वर्जित होते हैं। भारतीय मुहूर्त विज्ञान व ज्योतिष शास्त्र प्रत्येक कार्य के लिए शुभ मुहूर्तों का शोधन कर …

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सम्पूर्ण श्रीमद्भगवद्गीता ” गतांक से आगे – अध्याय सप्तम : ज्ञानविज्ञानयोग (भगवद्ज्ञान)

सज्जनो। कल के प्रसंग को हम विस्तार से समझने की कोशिश करते हैं, जैसा कि शास्त्रों में कहा गया है कि जो अल्पज्ञ है तथा जिन्होंने अपनी आध्यात्मिक चेतना खो दी है वे भौतिक इच्छाओं की अविलम्ब पूर्ति के लिये देवताओं की शरण में जाते हैं, सामान्यतः ऐसे लोग भगवान् …

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