India's No.#1 Hindi News Channel

चीन ने ट्रंप को दिया झटका! गाजा विवाद पर कड़े लफ्जों में साफ-साफ दिया समझा

डोनाल्ड ट्रंप के बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने से चीन ने इनकार कर दिया है। चीन ने संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय कानूनों पर आधारित इंटरनेशनल सिस्टम पर भरोसा जताया है।

ट्रंप की धमकी पर भड़का चीन, कहा-धर्म के नाम पर दूसरे देशों के मामलों में  दखल मंजूर नहीं - china backs nigeria warns against foreign  interference-mobileचीन ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बोर्ड ऑफ पीस को ठेंगा दिखा दिया है। चीन ने बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने से साफ मना कर दिया। चीन की तरफ से ये भी कहा गया कि वह यूएन चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के आधार पर बने अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था का पालन करता है। जान लें कि अमेरिका ने गाजा में शांति स्थापित करने के लिए बोर्ड ऑफ पीस का ऐलान किया है और इसमें भारत समेत तमाम देशों को शामिल होने का निमंत्रण भेजा है।

बोर्ड ऑफ पीस पर चीन का रिएक्शन

भारत में चीन के दूतावास की प्रवक्ता Yu Jing ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किया, ‘चीन को शांति बोर्ड में शामिल होने के लिए अमेरिका का निमंत्रण मिला है। लेकिन चीन ने हमेशा सच्चे बहुपक्षवाद का पालन किया है। अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य में चाहे जो भी बदलाव हो, चीन हमेशा संयुक्त राष्ट्र को ध्यान में रखकर बनाई गई अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, अंतरराष्ट्रीय कानून पर बेस्ड अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के उद्देश्यों और सिद्धांतों पर बेस्ड अंतरराष्ट्रीय संबंधों के बुनियादी मानदंडों की रक्षा के लिए काम करता रहेगा।’

ट्रंप का बोर्ड ऑफ पीस क्या है?

गौरतलब है कि वेस्टर्न एशिया में चल रहे संघर्ष को खत्म करने के लिए अमेरिका ने 20-सूत्रीय शांति योजना तैयार की है। इसके दूसरे फेज के तहत गाजा बोर्ड ऑफ पीस का गठन किया है। इसका मकसद गाजा पट्टी में शांति और स्थिरता को बढ़ावा देना है। संघर्ष के बाद Reconstruction की निगरानी करना है। बोर्ड ऑफ पीस सितंबर, 2025 में ट्रंप ने गाजा जंग खत्म करने की अपनी प्लानिंग के तहत प्रस्तावित किया था।

बोर्ड ऑफ पीस में कैसे मिलेगी जगह?

व्हाइट हाउस के एक स्टेटमेंट के अनुसार, प्रस्तावित बोर्ड ऑफ पीस के सदस्य गाजा में स्थायित्व और सुरक्षा से जुड़े अहम क्षेत्रों की जिम्मेदारी संभालेंगे। इनमें शासन क्षमता बनाने, पुनर्निर्माण, इन्वेस्टमेंट, फंडिंग जुटाना शामिल है। हालांकि, जो देश 1 अरब अमेरिकी डॉलर का डोनेट करेंगे, उन्हें बोर्ड ऑफ पीस में परमानेंट दी जाएगी, जबकि भुगतान न करने वाले देश भी इसमें शामिल हो सकते हैं। वह तीन साल के लिए बोर्ड में बिना पैसे दिए भी रह सकते हैं।

25 देशों ने स्वीकार किया न्योता

अमेरिका के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ ने एक इंटरव्यू में बताया कि अब तक 25 देशों ने बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने का न्योता स्वीकार कर लिया है। हालांकि, फ्रांस और चीन ने बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने से इनकार कर दिया है।

अन्य अपडेट लगातार पाने के लिए हमारा फेसबुक पेज लाइक करें| आप हमें ट्वीटर पर भी फॉलो कर सकते हैं| आप हमारा एंड्राइड ऐप भी डाउनलोड कर सकते है|

Comments are closed.