भारतीय बाजार पर आज कमजोर वैश्विक संकेतों का साफ असर दिखा। एशियाई बाजारों में भारी गिरावट देखने को मिली। दक्षिण कोरिया का कोस्पी करीब 4 फीसदी टूट गया, जबकि जापान का निक्केई लगभग 1 फीसदी गिरा। इससे पहले अमेरिकी बाजारों में नैस्डैक 1.5 फीसदी फिसला था। वैश्विक स्तर पर टेक शेयरों में बिकवाली हो रही है, जिसकी बड़ी वजह एआई सेक्टर में बढ़ती लागत और ऊंचे वैल्यूएशन को लेकर चिंता है। निवेशक अब मुनाफावसूली कर रहे हैं।
तीसरी तिमाही के नतीजे बाजार की उम्मीदों पर पूरी तरह खरे नहीं उतर सके हैं। कई कंपनियों के नतीजे अनुमान से कमजोर रहे, जिससे निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई। बजट और भारत-अमेरिका ट्रेड डील से जुड़ी उम्मीदें पहले ही कीमतों में शामिल हो चुकी थीं, अब फोकस फिर से कमाई और वैल्यूएशन पर लौट आया है। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में ऊंचे वैल्यूएशन को लेकर चिंता बढ़ रही है।
निवेशक आरबीआई की मौद्रिक नीति बैठक के नतीजों से पहले भी सतर्क नजर आए। भले ही ब्याज दरों में बदलाव की उम्मीद कम है, लेकिन ग्रोथ, महंगाई और लिक्विडिटी को लेकर केंद्रीय बैंक के संकेतों पर बाजार की नजर बनी हुई है।
डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी ने भी बाजार पर दबाव डाला। डॉलर इंडेक्स में मजबूती से विदेशी निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई, जिससे एफआईआई की खरीदारी पर ब्रेक लगता दिखा।
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