UP चुनावी दांव: मायावती OBC संग, अखिलेश ब्राह्मण नेताओं के साथ
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने ब्राह्मण नेताओं के साथ मुलाकात कर आगामी चुनाव की तैयारियों पर चर्चा की है। वहीं, मायावती ने भी ओबीसी नेताओं के साथ मीटिंग की है।


Akhilesh Yadav की पार्टी लंबे समय से “मुस्लिम-यादव” (MY) समीकरण पर आधारित मानी जाती रही है। लेकिन 2022 के बाद सपा ने अपने सामाजिक आधार को व्यापक बनाने की कोशिश तेज की है। इसी क्रम में:
उत्तर प्रदेश में ब्राह्मण आबादी लगभग 10-12% मानी जाती है। कई सीटों पर उनका प्रभाव निर्णायक हो सकता है। हालांकि यह भी सच है कि ब्राह्मण वोट एकसमान नहीं होता और अलग-अलग क्षेत्रों में उसका राजनीतिक व्यवहार अलग रहता है।
दूसरी ओर Mayawati भी ओबीसी वोटरों को साधने की कोशिश कर रही हैं।
Bharatiya Janata Party का सामाजिक गठबंधन वर्तमान में काफी व्यापक माना जाता है, जिसमें ब्राह्मण, अन्य सवर्ण, गैर-यादव ओबीसी और कुछ दलित वर्ग शामिल हैं। इसलिए विपक्षी दलों की रणनीति भाजपा के इस वोट बैंक में सेंध लगाने की है।
यदि वर्तमान संकेतों को देखें तो:
हालांकि चुनाव में अभी काफी समय है। उम्मीदवार चयन, स्थानीय मुद्दे, गठबंधन, सरकार के कामकाज और चुनावी माहौल जैसे कई कारक अंतिम परिणाम को प्रभावित करेंगे। इसलिए अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि ब्राह्मण सम्मेलन या ओबीसी बैठकों का चुनावी नतीजों पर कितना असर पड़ेगा।
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