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गोदावरी नदी क्षेत्र में भारी बारिश से नासिक मंदिर डूबा

नासिक: गोदावरी नदी क्षेत्र में पिछले दो दिनों से हो रही भारी बारिश के कारण आस पास के इलाके जलमग्न हो गये. गोदावरी नदी में बाढ़ आ गई और रामकुंड इलाके में कई छोटे-बड़े मंदिर पानी में डूब गए.

बताया जाता है कि गंगापुर बांध से भारी मात्रा में पानी छोड़ा जा रहा है. इसके चलते गोदावरी नदी में बाढ़ आ गई और रामकुंड इलाके में कई छोटे-बड़े मंदिर पानी में डूब गए. प्रशासन ने गोदावरी नदी के किनारे रहने वाले लोगों को चेतावनी जारी की है. नासिक में दुतोंड्या मारुति मंदिर परिसर में कमर तक पानी पहुंच गया.NASHIK HEAVY RAINFALL

नासिक जिले में पिछले दो दिनों से लगातार बारिश हुई. इससे सामान्य जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया. नासिक शहर को जलापूर्ति करने वाले गंगापुर बांध से रविवार सुबह 10 बजे से गोदावरी नदी में 5186 क्यूसेक पानी छोड़ा गया. साथ ही शहर के अन्य इलाकों से भी गोदावरी नदी में पानी आने से नदी का जलस्तर बढ़ गया.

गंगापुर बांध से पानी छोड़े जाने के कारण रामकुंड क्षेत्र में कई छोटे-बड़े मंदिर भी पानी में डूब गए. दुतोंड्या मारुति में सीने तक पानी पहुंच गया. इस क्षेत्र में ठेले और सब्जी बेचने वालों को हटा दिया गया. जिला प्रशासन ने अपील की है कि कोई भी नदी में न जाए और नदी किनारे के किसान अपने पशुओं और मोटर पंप को सुरक्षित स्थान पर ले जाएं.

जिले के गंगापुर बांध के साथ ही दारना, नांदुरमध्यमेश्वर, कडवा, पालखेड बांधों से 5186 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है. इसके कारण नदी किनारे के लोगों को सतर्क रहने की चेतावनी दी गई है. गोदावरी नदी में पानी बढ़ने के कारण रामकुंड जलमग्न हो गया. मूल रामकुंड के ऊपर 15 फीट पानी है. इस कारण गोदावरी नदी के किनारे अनुष्ठान सुरक्षित स्थानों पर हो रहे हैं. पानी बढ़ने के कारण अस्थि विसर्जन और धार्मिक अनुष्ठान के लिए आने वाले नागरिकों को पानी में न उतरने और अपने सामान का ध्यान रखने की सलाह दी जा रही है.

पुजारी सतीश शुक्ला ने बताया कि रामकुंड में अस्थि विसर्जन का विशेष महत्व है. किवदंती है कि गोदावरी तीर्थ स्थल में अस्थि विसर्जन करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है. साथ ही भगवान के धाम में शांति मिलती है. भगवान प्रभु राम अपने 14 वर्ष के वनवास के दौरान कई वर्षों तक नासिक में रहे थे. इसलिए भगवान राम ने यहां स्नान और पूजा-अर्चना की थी. साथ ही यह स्थान सिंहस्थ कुंभ का पवित्र स्थल भी था. चूंकि यह सबसे पुराना तीर्थ स्थल है, इसलिए देश भर से हजारों श्रद्धालु यहां आते हैं.

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