अरविंद मतलब शिक्षा विभाग का सबकुछ……….!
शहडोल/ कहते हैं, कुछ लोग जन्म से ही खास होते हैं, लेकिन अरविंद पाण्डेय ने तो खास होने की परिभाषा ही बदल दी है। वे रमसा (राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान) के कर्मचारी जरूर हैं, पर विगत कई वर्षों से जिला शिक्षा कार्यालय में अटैच होकर ऐसा स्थायी सिंहासन बना चुके हैं जैसे अंगद का पांव हो, जिसे न कोई शासन हिला सकता है, न ही प्रशासन।

प्रदेश के मुख्यमंत्री बदल गए, कई कलेक्टर कमिश्नर बदलते रहे, कमिश्नर आते-जाते रहे, संयुक्त संचालक आते हुए थके और जाते वक्त घुटने टेकते गए, लेकिन अरविंद पाण्डेय, वहीं के वहीं, अडिग और अपराजेय, विगत कई वर्षों से एक ही कुर्सी पर विराजमान अरविंद पाण्डेय को देख अब लोग कहने लगे हैं। यदि ब्रह्मा ने एक बार शहडोल के शिक्षा विभाग की रचना की होती, तो ‘अरविंद पाण्डेय’ नामक पद पहले से ही सृजित होता। यह एकमात्र ऐसा पद है, जिसे कोई नियम, कोई स्थानांतरण आदेश, कोई अटैचमेंट समाप्त नहीं कर पाया।
Comments are closed.