सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई से पहले ओबीसी आरक्षण को लेकर क्यों छिड़ा विवाद?
मध्य प्रदेश की बीजेपी सरकार ओबीसी आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल करने के बाद विवादों में घिर गई. वायरल पोस्ट्स में हलफनामे पर ‘हिंदू विरोधी’ होने का आरोप लगाया गया. सरकार ने इन दावों को सिरे से खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि यह सामग्री उनके मौजूदा हलफनामे का हिस्सा नहीं, बल्कि 1983 की रामजी महाजन आयोग रिपोर्ट से संबंधित है. सरकार 27% ओबीसी आरक्षण का बचाव कर रही है.![सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई से पहले मध्य प्रदेश में ओबीसी आरक्षण को लेकर क्यों छिड़ा विवाद? सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई से पहले मध्य प्रदेश में ओबीसी आरक्षण को लेकर क्यों छिड़ा विवाद?]()
मध्य प्रदेश की बीजेपी सरकार अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल करने के बाद विवाद में फंस गई है. बीजेपी पर ‘हिंदू विरोधी’ होने का आरोप लगाते हुए स्क्रीनशॉट वायरल हुए. एक वायरल पोस्ट में दावा किया गया सरकार का हलफनामा 1983 की रामजी महाजन आयोग रिपोर्ट का भी सहारा ले रहा है. हालांकि सरकार ने ऐसे आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है. वायरल पोस्ट में ऐतिहासिक संदर्भ का जिक्र किया गया.
वायरल पोस्ट में दावा किया गया कि मध्य प्रदेश सरकार का सुप्रीम कोर्ट में दिया गया हलफनामा सभी सामान्य जाति के लोगों के लिए एक चेतावनी है. हमेशा हिंदुओं को एकजुट करने का दावा करने वाली पार्टी अब अदालत में हिंदू धर्म को अन्याय, शोषण और बुराई का प्रतीक बता रही है. आरोप लगाए गए कि हलफनामे के कथित अंशों में लगभग 80 फीसदी हिंदुओं के पिछड़ेपन के लिए रामायण और मनुस्मृति जैसे हिंदू धर्मग्रंथों को दोषी ठहराया गया.

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