भागीरथपुरा में दूषित पानी का डर अब भी बरकरार, 40 हजार लोग वाटर टैंकर्स के सहारे जिंदगी जीने को मजबूर; 69 बोरिंग दूषित
भागीरथपुरा में दूषित पानी का डर अभी खत्म नहीं हुआ है, जहर अब भी बह रहा है। 69 पानी की बोरिंग नर्मदा पाइपलाइन से जुड़ी मिलीं।

भागीरथपुरा में दूषित पानी का डर अब भी बरकरार है। इलाके के 69 बोरिंग भी दूषित पानी की चपेट में हैं। 40 हजार लोग पानी के टैंकरों के सहारे जिंदगी जीने को मजबूर हैं। क्षेत्र की जनता अब निगम के पानी के टैंकर और पानी की केन खरीद के भरोसे है। हर गली में टैंकर नगर निगम की गाड़ियां दिखाई दे रही हैं। पानी के लिए छोटे-छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्ग भी लाइन में शुमार हैं। इलाके के लोगों ने जमकर नारेबाजी की। लोगों ने नगर निगम हाय हाय के नारे लगाए।
जानकारी के अनुसार, नगर निगम ने नर्मदा पाइपलाइन बिछाने के लिए सबसे 1200-1200 रुपये लिए थे। 69 बोरिंग को बंद किया गया। यहां भी दर्जनों की भीड़ एकत्र हुई और नाराजगी जाहिर की। 30 से 50 लोग नारे लगा रहे थे। महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग, सभी को उल्टी दस्त हुआ था। सभी अस्पताल जा चुके हैं और सभी ने दवाइयां ली हैं।
15 लोग गंवा चुके हैं जान
बता दें कि दूषित पानी की वजह से 15 लोगों की मौत हो चुकी है। अस्पतालों में अब भी 208 मरीज भर्ती हैं, जिनमें से 27 की हालत नाजुक बनी हुई है। इस घटना के बाद इंदौर में पाइपलाइन बिछाने का काम शुरू कर दिया गया है। यह काम तीन साल से लटका हुआ था। अगर तीन साल पहले नर्मदा पाइपलाइन बिछ जाती तो दूषित पानी की वजह से 15 लोगों की मौत नहीं होती और कई अन्य घायल नहीं होते।
बता दें कि वर्ष 2022 में भागीरथपुरा में नर्मदा पाइपलाइन बिछाने के काम को परमिशन मिली थी। पूरा प्रोजेक्ट 2.4 करोड़ का था। पाइपलाइन बिछाने का काम दो चरणों में किया जाना था, लेकिन प्रशासन तीन साल तक इसे लटकाए रखा।
पहले फेज की फाइलों का सच
- जुलाई 2022- पाइपलाइन बिछाने का टेंडर जारी
- 25 नवंबर 2022- महापौर परिषद से मंजूरी
- 3 फरवरी 2023- लगभग ढाई महीने बाद अपर आयुक्त के हस्ताक्षर
- 6 फरवरी 2023- मेयर पुष्यमित्र भार्गव के हस्ताक्षर
इसके बावजूद पहले चरण का काम अब तक पूरा नहीं हुआ।
दूसरा चरण
- नवंबर 2024- फाइल तैयार
- 8 अगस्त 2025 – 9 महीने बाद टेंडर जारी
- 17 सितंबर 2025 – टेंडर खुलना था, लेकिन नहीं खुला
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