जानें क्या हैं उनके 3 मुख्य मुद्दे, 543 से 850 सीटें: महिला आरक्षण पर क्यों गरमाया विपक्ष
कल से महिला आरक्षण लागू करने को लेकर लोकसभा में चर्चा की शुरुआत हो रही है। सरकार इसे 2029 से ही लागू करना चाहती है। लेकिन विरोधी पार्टियां इसके पीछे सियासी साजिश की तरफ इशारा कर रही हैं।
लोकसभा सीटें 850 होने के भय से भड़का विपक्ष
महिला आरक्षण को लेकर कल से संसद में चर्चा शुरू होनी है। 16 और 17 अप्रैल को लोकसभा में चर्चा होगी। राज्यसभा में 18 अप्रैल को महिला आरक्षण को लेकर चर्चा की जाएगी, दोनों सदनों में वोटिंग भी होगी। महिला आरक्षण लागू करने को लेकर संसद में मैराथन चर्चा कल से शुरू हो रही है। सरकार ने बजट सत्र को तीन दिनों तक बढ़ाया है ताकि इस बेहद अहम मुद्दे पर चर्चा हो सके।
विपक्ष का कहना है कि महिला आरक्षण को डिलिमिटेशन से क्यों जोड़ा जा रहा है। सरकार लोकसभा की सीटें 543 से बढ़ाकर 850 क्यों करना चाहती है। महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण मौजूदा 543 सीटों पर ही देने में क्या दिक्कत है।
महिला आरक्षण पर संसद सत्र से पहले घमासान तेज हो गया है। विपक्षी दलों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। दोपहर 3 बजे कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के घर पर INDI अलायंस की भी मीटिंग होनी है। विपक्ष का कहना है कि महिला आरक्षण की आड़ में सरकार डिलिमिटेशन करना चाहती है ताकि 2029 में उसे सियासी फायदा मिल सके।
मल्लिकार्जुन खरगे के घर पर बैठक
शाम 3 बजे होने वाली विपक्ष के नेताओं की बैठक से पहले कांग्रेस अपने स्ट्रेटजी कमिटी मीटिंग में महिला आरक्षण के तमाम पहलुओं पर चर्चा कर रही है। मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी, शशि थरूर, प्रमोद तिवारी, तारीक अनवर, कुमारी शैलजा, जयराम रमेश, के सी वेणुगोपाल, मनीष तिवारी सभी मीटिंग में मौजूद हैं।
महिला आरक्षण को लेकर विपक्ष के मुख्य मुद्दे क्या है?
- मौजूदा सीटों में ही आरक्षण दिया जाए, खरगे यह बात सदन में कह चुके हैं कि मौजूदा लोकसभा और विधानसभा की सीटों में ही आरक्षण दिया जाए। 543 सीटों में ही लोकसभा की 33% सीट महिलाओं के लिए आरक्षित की जाए।
- सरकार के पचास फीसदी सीटों को बढ़ाकर 33% सीटों में आरक्षण देने से दक्षिण भारतीय राज्यों को काफी नुकसान होगा, जिसका चुनावी फायदा बीजेपी को होगा, इसका विरोध विपक्षी दल कर रहे हैं।
- कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कार्यसमिति की बैठक में कहा था कि आरक्षण के भीतर फॉर्मूला के तहत ओबीसी को दिया जानी चाहिए। सोनिया गांधी ने केंद्र सरकार पर बड़ा आरोप लगाते हुए कहा था कि संसद के विशेष सत्र में असली मुद्दा महिला आरक्षण नहीं, बल्कि परिसीमन है।
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