UP में 10% महंगी होने वाली थी बिजली, अब नहीं बढ़ेंगे दाम, UPPCL के प्रस्ताव पर लगी रोक

UP : बिजली उपभोक्ताओं को नियामक आयोग की ओर से बड़ी राहत दी गई है। ये सुनकर आपको भी सुकून मिलेगा। नियामक आयोग ने बड़ा फैसला सुनाते हुए 10 प्रतिशत फ्यूल सरचार्ज को गैरकानूनी बताया है और 10 प्रतिशत फ्यूल सरचार्ज की वसूली को गलत ठहराया है। उपभोक्ता परिषद ने लोक महत्व प्रस्ताव दाखिल किया था, जिसके बाद अब हर कीमत पर पावर कारपोरेशन को 10 प्रतिशत बिजली सरचार्ज का फैसला वापस लेना होगा। उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद द्वारा प्रदेश के 3 करोड़ 73 लाख विद्युत उपभोक्ताओं के हित में दाखिल जनहित एवं लोकमहत्व प्रत्यावेदन पर उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग (UPERC) ने गंभीरता दिखाते हुए कड़ा रुख अपनाया है।
क्या कहा आयोग ने
मामले की गंभीरता को देखते हुए UPERC ने अपने आदेश में महत्वपूर्ण टिप्पणियां की हैं। आयोग ने कहा है कि न्यायिक आदेशों के अनुसार देय बकाया राशि, एनटीपीसी को देय पुराने भुगतान, केंद्रीय ट्रांसमिशन उपयोगिता से संबंधित बकाया तथा अन्य ऐतिहासिक देनदारियों को एफपीपीएएस/एफपीपीसीए गणना में शामिल करने से उपभोक्ताओं पर भारी वित्तीय बोझ पड़ता है। इससे आयोग को उन लागतों की प्रकृति, विवेकशीलता, स्वीकार्यता और वसूली की वैधता की जांच करने का अवसर नहीं मिल पाता।
आयोग ने स्पष्ट रूप से कहा है कि ऐसा दृष्टिकोण न तो यूपीईआरसी एमवाईटी विनियम-2025 के विनियमन 16.1 के अनुरूप है और न ही उपभोक्ता संरक्षण के मूल सिद्धांतों से मेल खाता है। आयोग की राय है कि पिछली अवधि के बकाया एवं ऐतिहासिक देनदारियों को वर्तमान एफपीपीएएस गणना में शामिल करना विनियम 16.1 के प्रावधानों के साथ असंगत है।
फरवरी में 10 प्रतिशत वसूला गया था सरचार्ज
फरवरी 2026 में भी उपभोक्ताओं से 10 प्रतिशत फ्यूल सरचार्ज वसूला गया था, जिस पर आयोग पहले ही स्पष्टीकरण मांग चुका है और वह मामला अभी लंबित है। ऐसे में जून 2026 में फिर से 10 प्रतिशत फ्यूल सरचार्ज लागू करना उपभोक्ता हितों के विपरीत है। उपभोक्ता परिषद ने आयोग से मांग दोहराई है कि जून 2026 में लागू 10 प्रतिशत अतिरिक्त वसूली पर तत्काल रोक लगाई जाए। फ्यूल सरचार्ज की गणना में शामिल पुराने दावों की स्वतंत्र जांच कराई जाए। महंगी बिजली खरीद के कारणों की समीक्षा की जाए तथा उपभोक्ताओं के हित में उपलब्ध अधिशेष धनराशि का समायोजन सुनिश्चित किया जाए।
पुराने बकाया दावों पर क्या कहा गया है
उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष एवं केंद्र तथा राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने आयोग के अध्यक्ष अरविंद कुमार तथा सदस्य संजय कुमार सिंह से भेंट कर विस्तृत लोकमहत्व एवं जनहित प्रत्यावेदन प्रस्तुत किया था। परिषद ने आयोग को तथ्यों और आंकड़ों के साथ अवगत कराया कि फ्यूल एवं पावर परचेज कॉस्ट एडजस्टमेंट (FPPCA) की गणना में मार्च 2026 की वास्तविक बिजली खरीद लागत के साथ-साथ लगभग 1400 करोड़ रुपये के पुराने बकाया दावों एवं पूर्व अवधि की देनदारियों को भी जोड़ दिया गया, जो कानून और नियामकीय व्यवस्था के विपरीत है।
बिजली बिल में कमी होनी चाहिए थी
परिषद ने आयोग को बताया कि यदि UPPCL ने विनियमों के अनुरूप सही गणना की होती तो जून 2026 में उपभोक्ताओं पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त भार डालने के बजाय लगभग 2 प्रतिशत की दर से बिजली बिलों में कमी लागू होती। परिषद का दावा है कि आयोग द्वारा स्वीकृत बिजली खरीद लागत लगभग 4.94 रुपये प्रति यूनिट थी, जबकि मार्च 2026 के लिए लगभग 5.86 रुपये प्रति यूनिट लागत दर्शाकर उपभोक्ताओं पर लगभग 1610 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय बोझ डाल दिया गया।
सात दिनों के भीतर यूपीपीसीएल को देना होगा स्पष्टीकरण
इसी आधार पर आयोग ने यूपीपीसीएल को सात दिनों के भीतर विस्तृत स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। आयोग ने संबंधित माह के एफपीपीएएस की विस्तृत गणना, उसमें शामिल सभी मदों का विवरण, वर्तमान अवधि एवं पूर्व अवधि की बिजली खरीद लागत तथा ट्रांसमिशन शुल्क का पूरा विवरण, एपीटीईएल के आदेशों के अनुपालन में किए गए भुगतानों का ब्यौरा तथा वह कानूनी एवं नियामकीय आधार मांगा है जिसके तहत पिछली अवधि की देनदारियों को एफपीपीएएस गणना में शामिल किया गया।
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