नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन को एसआईआर का नोटिस मिला तो पश्चिम बंगाल की राजनीति में भूचाल आ गया. तृणमूल कांग्रेस ने इसे बंगाल के गौरव का अपमान बताया और पूछा- क्या भारत रत्न से भी यह सवाल होना चाहिए. मामला इतना बढ़ा कि चुनाव आयोग को सफाई देनी पड़ी. बताना पड़ा कि नोटिस जानबूझकर नहीं भेजा गया, बल्कि एक सिस्टम जेनरेटेड प्रॉसेस है. एक एरर की वजह से ऐसा हुआ. तो पूरा मामला है क्या, अमर्त्य सेन की मां की उम्र को लेकर क्या कन्फ्यूजन हुआ?
दरअसल, टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी ने एक दिन पहले रामपुरहाट की जनसभा में दावा किया कि चुनाव आयोग ने अमर्त्य सेन जैसे विश्वविख्यात विद्वान को एसआईआर का नोटिस भेजा है और सुनवाई के लिए बुलाया है. इसके बाद सियासी गलियारों में शोर मच गया. मामला बढ़ने पर चुनाव आयोग ने भी जांच शुरू की. पता चला कि अमर्त्य सेन के वोटर डेटा में एक तकनीकी खामी थी, जिसकी वजह से एक ऑटोमैटिक नोटिस जेनरेट हो गया.

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