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अब परमाणु युद्ध के मुहाने पर होगी दुनिया, 50 साल में पहली बार खत्म होने जा रही रूस-अमेरिका की न्यूक्लियर डील

रूस-अमेरिका में 50 साल में पहली बार न्यूक्लियर डील 5 फरवरी को समाप्त हो रही है। इससे दुनिया पर से परमाणु नियंत्रण खत्म हो जाएगा। ऐसे में दुनिया में परमाणु हथियारों की होड़ और बढ़ सकती है।

Barring last-minute nuclear deal, US and Russia teeter on brink of new arms  race | Reuters
अमेरिका और रूस के बीच बचा हुआ आखिरी न्यूक्लियर हथियार नियंत्रण समझौता न्यू START 5 फरवरी को समाप्त हो जाएगा। इससे दुनिया के दो सबसे बड़े परमाणु हथियार भंडारों पर कोई सीमा नहीं रहेगी। 50 साल से अधिक समय में ऐसा पहली बार होगा। यह समझौता समाप्त होने से कई विशेषज्ञों को डर है कि अब अनियंत्रित परमाणु हथियारों की होड़ शुरू हो सकती है, जो वैश्विक अस्थिरता बढ़ाएगी और दुनिया को परमाणु युद्ध के मुहाने पर खड़ा कर देगी।

क्यों टूट रहा रूस-अमेरिका के बीच ये बड़ा समझौता?

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने सितंबर 2025 में प्रस्ताव दिया था कि अगर अमेरिका भी ऐसा करता है तो समझौते की सीमाओं का एक साल और पालन किया जाएगा। मगर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस पर कोई स्पष्ट प्रतिबद्धता नहीं जताई। ट्रंप ने बार-बार कहा है कि वे परमाणु हथियारों पर सीमा रखना चाहते हैं, लेकिन इसमें चीन को भी शामिल करना चाहते हैं। एक व्हाइट हाउस अधिकारी (गुमनाम) ने बताया कि ट्रंप “अपने समय पर” फैसला लेंगे। बीजिंग ने अपने छोटे, लेकिन बढ़ते परमाणु भंडार पर किसी भी प्रतिबंध को खारिज किया है।

दुनिया हो जाएगी बेहद खतरनाक-क्रेमलिन

क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने कहा है कि अमेरिका और रूस के परमाणु भंडारों पर सीमा न होने से दुनिया “और खतरनाक” हो जाएगी। आर्म्स कंट्रोल एसोसिएशन के कार्यकारी निदेशक डैरिल किम्बॉल ने चेतावनी दी कि समझौते की समाप्ति से दोनों पक्ष पहली बार 35 साल में तैनात परमाणु हथियारों की संख्या बढ़ा सकते हैं। इससे अमेरिका, रूस और चीन के बीच तीन-तरफा अनियंत्रित होड़ शुरू हो सकती है। समझौते के बिना दोनों पक्ष “सबसे खराब स्थिति” की तैयारी करेंगे, जिससे तैनाती बढ़ेगी और परमाणु युद्ध का खतरा बढ़ेगा।

रूस-अमेरिका के बीच में क्या था समझौता

न्यू START डील पर 2010 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बाराक ओबामा और रूसी राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव ने हस्ताक्षर किया था। यह दोनों पक्षों को 1,550 तैनात परमाणु वारहेड्स (warheads) और 700 मिसाइलों/बॉम्बर्स तक सीमित करता था। समझौता 2021 में पांच साल के लिए बढ़ाया गया था। इसमें साइट पर निरीक्षण (on-site inspections) का प्रावधान था, लेकिन COVID-19 के कारण 2020 में रुक गए और कभी बहाल नहीं हुए। फरवरी 2023 में पुतिन ने रूस की भागीदारी निलंबित कर दी, क्योंकि अमेरिका और नाटो यूक्रेन युद्ध में रूस की हार चाहते थे। हालांकि, रूस ने कहा कि वह सीमाओं का पालन करेगा। पुतिन ने सितंबर 2025 में एक साल की अनौपचारिक सीमा का प्रस्ताव दिया, ताकि नया समझौता हो सके।

ट्रंप के कदम ने बढ़ाई दुनिया की मुश्किल

ट्रंप ने अक्टूबर 2025 में कहा था कि वे परमाणु परीक्षण फिर शुरू कर सकते हैं। ट्रंप के इस बयान से क्रेमलिन चिंतित है। पुतिन ने भी कहा है कि अगर अमेरिका परीक्षण करेगा तो रूस भी करेगा। अमेरिकी ऊर्जा सचिव क्रिस राइट ने कहा कि परीक्षण में न्यूक्लियर विस्फोट नहीं होंगे। यह समझौता 1972 के SALT I से शुरू हुई परमाणु नियंत्रण श्रृंखला का आखिरी हिस्सा है। 2001 में अमेरिका ने ABM ट्रीटी से बाहर निकल लिया, जिसके जवाब में रूस ने Burevestnik और Poseidon जैसे हथियार विकसित किए। 2019 में INF ट्रीटी भी समाप्त हो गई। रूसी सुरक्षा परिषद के उपाध्यक्ष मेदवेदेव ने कहा बिना समझौते के रूस “किसी भी नई धमकी का कड़ा जवाब देगा।

ट्रंप की “गोल्डन डोम” डिफेंस योजना ने रूस-चीन को चिंता में डाला

इस बीच ट्रंप की “गोल्डन डोम” मिसाइल डिफेंस योजना से रूस और चीन दोनों देश चिंतित हैं, क्योंकि इससे वे अपने आक्रामक हथियार बढ़ा सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह वैश्विक परमाणु प्रतिस्पर्धा का नया खतरनाक दौर शुरू कर सकता है, जहां खर्च बढ़ेगा और संबंध अस्थिर होंगे। किम्बॉल ने कहा, “यह हमारे जीवनकाल में सबसे खतरनाक परमाणु प्रतिस्पर्धा का मोड़ हो सकता है।”

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