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आधी रात को आया सुप्रीम आदेश, कोलकाता से दिल्ली तक 20 घंटों में ऐसा क्या हुआ?

सुप्रीम कोर्ट ने बंगाल के मालदा जिले में न्यायिक अधिकारियों का घेराव होने की अप्रत्याशित घटना पर बेहद सख्त नाराजगी जाहिर की. अदालत ने न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी केंद्रीय सुरक्षाबलों को संभालने का आदेश दिया है.After 48 years in Delhi, the landlord will get the shop back the court  pronounced this decision | Supreme Court : दिल्ली में 48 साल बाद मकान मालिक  को वापस मिलेगी दुकान,

पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में बुधवार को 7 न्यायिक अधिकारियों का घेराव कर बंधक बनाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट का बेहद गंभीर रुख सामने आया है. इसमें तीन महिला अधिकारी थीं. मालदा में दोपहर 3.30 बजे घटी इस घटना को लेकर बंगाल के डीजीपी और कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के साथ ग्रुप कॉल की. सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस खुद देर रात 2 बजे तक मामले की निगरानी करते रहे. गुरुवार को सुबह जब सुनवाई हुई तो कोर्ट ने सख्त टिप्पणी की. रात 11 बजे तक घटनास्थल पर डीएम के न पहुंचने पर सवाल उठाए. घेराव खत्म होने के बाद लौट रहे इन अधिकारियों पर पथराव के साथ हमले की कोशिश भी हुई.

मालदा न्यायिक अधिकारियों के घेराव का पूरा घटनाक्रम

1 अप्रैल – दोपहर 3:30 बजे
मालदा के कालियाचक में घेराव शुरू हुआ, बीडीओ कार्यालय में 7 न्यायिक अधिकारियों (जिनमें 3 महिलाएं शामिल हैं) का घेराव

सुप्रीम कोर्ट 

ने गुरुवार को सुनवाई के दौरान ममता बनर्जी की सरकार में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर नाराजगी जताई. मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत मिश्रा ने कहा, ये बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है. बंगाल सबसे राजनीतिक ध्रुवीकरण वाला राज्य है.मुझे आधी रात को आदेश देना पड़ा. सुप्रीम कोर्ट ने मालदा के कालियाचक इलाके में हुए विरोध प्रदर्शन से जुड़ी मीडिया खबरों का हवाला दिया, जिसमें न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाया गया था.

विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के बाद पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची से हटाए गए मतदाताओं ने मालदा जिले के कालियाचक ब्लॉक में इन न्यायिक अधिकारियों का घेराव कर लिया था. एसआईआर के दौरान चुनाव आयोग ने तमाम मतदाताओं को विचाराधीन स्थिति में रखा है. चुनाव आयोग और बंगाल की ममता सरकार में आरोप प्रत्यारोप के बीच वोटरों के दस्तावेजों के सत्यापन का काम सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर इन न्यायिक अधिकारियों को सौंपा गया था, जिनमें तीन महिलाएं भी शामिल थीं. खबरों के मुताबिक, चुनाव आयोग ने कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सुजय पॉल को इस बारे में सूचित कर दिया था, जो सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के बाद ऐसे वोटरों के दस्तावेजों की सत्यापन की निगरानी कर रहे हैं.

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