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1 ट्रक और ₹60 हजार से खड़ा किया ₹1500 करोड़ का साम्राज्य

₹60,000 की पूंजी से ट्रांसपोर्ट बिजनेस शुरू किया। शुरुआत सिर्फ एक ट्रक और छोटे से ऑफिस से हुई। लेकिन उनकी सोच केवल माल ढुलाई तक सीमित नहीं थी। उन्होंने पूरी लॉजिस्टिक्स सर्विस की अवधारणा पर काम किया, जिसमें बुकिंग, बिलिंग, कार्गो मैनेजमेंट, समय पर डिलीवरी और ग्राहक सेवा जैसे पहलू शामिल थे।

जब हौसले बुलंद हों और कुछ कर गुजरने का जज्बा हो, तो मामूली सी शुरुआत भी एक दिन विशाल साम्राज्य में बदल जाती है। भारतीय कॉर्पोरेट जगत में फर्श से अर्श तक पहुंचने की वैसे तो कई कहानियां हैं, लेकिन हरियाणा के एक साधारण परिवार में जन्मे अजय सिंघल (Ajay Singhal) की सफलता की दास्तान युवाओं को सबसे ज्यादा प्रेरित करने वाली है। महज 18 साल की उम्र में बिजनेस की दुनिया में कदम रखने वाले अजय सिंघल ने कभी सिर्फ ₹60,000 की पूंजी और एक पुराने ट्रक के साथ अपनी किस्मत आजमाई थी। आज उनकी मेहनत का नतीजा है कि उनकी कंपनी ओम लॉजिस्टिक्स (Om Logistics) का सालाना टर्नओवर ₹1500 करोड़ से ज्यादा हो चुका है।

आज 85 देशों में फैला है ₹1500 करोड़ का यह साम्राज्य

एक ट्रक से शुरू हुआ यह सफर आज एक विशाल वटवृक्ष बन चुका है। वर्तमान में ओम ग्रुप दुनिया के 85 देशों और भारत के 1,500 से अधिक लोकेशंस पर अपनी सेवाएं दे रहा है। कंपनी के पास 5000 से ज्यादा कर्मचारी हैं। देश-विदेश में 20 मिलियन (2 करोड़) स्क्वायर फीट से ज्यादा का लॉजिस्टिक्स स्पेस/वेयरहाउस है। आज दुनिया के सबसे बड़े और नामचीन ब्रांड्स अपने सामान की सुरक्षित डिलीवरी के लिए ओम लॉजिस्टिक्स पर भरोसा करते हैं।

1982 में 1 ट्रक के साथ रखा लॉजिस्टिक्स में कदम

साल 1982 में अजय सिंघल ने इन ₹60,000 का इस्तेमाल कर एक छोटे से ऑफिस से अपने ट्रांसपोर्ट बिजनेस की शुरुआत की। उस वक्त उनके पास केवल एक ट्रक था। लेकिन अजय की सोच बाकी ट्रांसपोर्टरों से अलग थी। उन्होंने केवल सामान को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने के बजाय ग्राहकों को कंपलीट लॉजिस्टिक्स सर्विसेज जैसे बुकिंग, बिलिंग, कार्गो मैनेजमेंट, टाइमली डिलीवरी और बेहतरीन कस्टमर सपोर्ट देना शुरू किया।

रेडियो पार्ट्स बेचने से हुई थी शुरुआत

अजय सिंघल का जन्म हरियाणा में हुआ था और उन्होंने रोहतक गवर्नमेंट कॉलेज से प्री-इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी। बिजनेस करने की ललक उनके अंदर कूट-कूट कर भरी थी। महज 18 साल की उम्र में उन्होंने दिल्ली के वजीराबाद इलाके में अपने चाचा के साथ मिलकर सिर्फ ₹3000 के निवेश से रेडियो पार्ट्स बनाने का एक छोटा सा बिजनेस शुरू किया। बिजनेस चलाने के साथ-साथ अजय ने अपनी पढ़ाई नहीं छोड़ी और दिल्ली यूनिवर्सिटी से बी.कॉम की डिग्री पूरी की। करीब 4 साल तक रेडियो पार्ट्स का काम करने के बाद, उन्होंने उस बिजनेस को ₹60,000 में बेच दिया। यही ₹60,000 उनके जीवन का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट बनने वाले थे।

मारुति सुजुकी को बनाया पहला क्लाइंट, आधे दाम में दी सर्विस

अजय सिंघल बाजार की नब्ज और ग्राहकों की जरूरत को बखूबी समझते थे। उन्होंने मार्केट की डिमांड के हिसाब से अपने ट्रक्स को मॉडिफाई किया और ऐसी कॉम्पिटिटिव कीमतें पेश कीं कि बड़े-बड़े कॉम्पिटिटर्स दंग रह गए। जब उस दौर में अन्य ट्रांसपोर्टर्स दिल्ली से मुंबई की डिलीवरी के लिए करीब ₹3000 चार्ज करते थे, तब अजय ने वही सर्विस महज ₹1200 में ऑफर कर दी। उनकी इस स्मार्ट स्ट्रेटजी और शानदार सर्विस ने देश की दिग्गज ऑटोमोबाइल कंपनी मारुति सुजुकी का ध्यान खींचा और वह उनके पहले बड़े क्लाइंट बने। इसके बाद बजाज और टाटा मोटर्स जैसे बड़े ब्रांड्स भी उनके साथ जुड़ गए। ओम लॉजिस्टिक्स मॉडिफाइड ट्रक्स के जरिए मारुति की गाड़ियां ट्रांसपोर्ट करने वाली भारत की पहली कंपनी बनी।

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