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महीने भर बाद भी नही मिला पुनर्वास पैकेज, पहाड़ पर झोपड़ी डालकर रहने को मजबूर कनहर विस्थापित

दुद्धी, सोनभद्र।सिंचाई विभाग द्वारा निर्माणाधीन कनहर बांध को तय समय में लगभग पूर्ण करने के बाद सबसे बड़ी चुनौती डूब क्षेत्र को खाली कराना था,जिसे गम्भीरता से लेते हुए सिंचाई विभाग एवं शासन-प्रशासन द्वारा लगभग खाली करा दिया गया लेकिन बजट नही होने के कारण दर्जनों परिवारों को बिना पैकेज दिए ही यह आश्वाशन देकर खाली कराया गया कि बजट आते ही पखवाड़े भर में विस्थापन पैकेज दे दिया जाएगा,लेकिन डूब क्षेत्र खाली करने के महीने भर बाद भी कोई जिम्मेदार सुधि लेने नही आया और न ही उन्हें मुआवजा मिल सका।जिससे कनहर विस्थापित मुनिया पत्नी रामटहल, झुकसी पत्नी शिव,विजय पुत्र लक्ष्मण, लाल कन्हैया पुत्र रवि,फजीहत पुत्र शिव,लक्ष्मण पुत्र हरिकिशुन, रामजीत पुत्र मोहन,उजित पुत्र मोहन,नन्दलाल पुत्र रामपति, रमाशंकर पुत्र रामपत5,नरेश पुत्र भोला, राजेश पुत्र भोला, बजरंगी पुत्र रवि सभी निवासी कुदरी के दर्जनों परिवार बिना पैकेज ही हटाए जाने के कारण पहाड़ों पर शरण लेने को बिबस हैं।

अब आप सोचिए बरसात के दिनों में जहां अब तक दर्जनों लोग आकाशीय बिजली की चपेट में आने व सर्प दंश से काल के गाल में समा चुके हैं वहीं जबरन विस्थापित किये गए लोग कुदरी गांव के पहाड़ों में झोपडी डालकर रहने को मजबूर हैं क्योंकि उनके पास न तो अब जमीन है और न कोई घर, आखिर वे जाएं तो कहां जाएं ? ऐसे में लोग पहाड़ों जंगलों में रहकर इस बरसात में किसी तरह गुजर बसर करने को मजबूर हैं और उनकी बेबसी सुनने व देखने वाला कोई नहीं है।
बता दें कि कनहर डूब कुदरी गांव के कुछ आदिवासी परिवार कनहर बांध के सबसे नजदीक बसे हुए थे जहां उनके बाप दादा रहकर खेती किसानी करके अपनी आजीविका चलाते हुए जीवन गृहस्थी चल रही थी लेकिन कनहर बांध के कारण उन्हें बिना पुनर्वास पैकेज के ही जिम्मेदार अधिकारियों ने हटा दिया और अब महीने भर बाद भी उन आदिवासी परिवारों को न तो पुनर्वास पैकेज मिला और न ही भूमि का पट्टा।

सिंचाई विभाग के एसडीओ रवि श्रीवास्तव ने बताया कि शासन स्तर से बजट मिलते ही सूचीबद्ध विस्थापितों को विस्थापन पैकेज दे दिया जाएगा।

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