मानबहादुर सिंह गंवई और किसानी जीवन के अद्वितीय कवि हैं – कमल नयन पाण्डेय
– डॉ राम प्यारे प्रजापति की पुस्तक जनकवि मानबहादुर सिंह पर केंद्रित परिचर्चा

कादीपुर (सुलतानपुर)। गंवई और किसानी जीवन की जो छवि मानबहादुर सिंह की कविताओं में है वह हिंदी जाति में किसी कवि के यहां नहीं है। जीवन के अनछुये और अबूझ पहलुओं को मानबहादुर सिंह ने अपनी कविताओं में उद्घाटित किया है। वह आधुनिक हिन्दी साहित्य के बड़े कवि हैं। यह बातें वरिष्ठ साहित्यकार कमल नयन पाण्डेय ने कहीं ।
वह रणवीर राजकुमार इंटर कालेज बरवारीपुर में प्रतिमान द्वारा आयोजित डॉ राम प्यारे प्रजापति की आलोचनात्मक पुस्तक जनकवि मान बहादुर सिंह पर केंद्रित परिचर्चा को बतौर मुख्य वक्ता सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि मान बहादुर सिंह ने ज्यातर कथा कविताएं लिखी हैं। उनकी इतिहास दृष्टि भी अद्भुत थी।जिसके पास लोकानुभव होगा वही मानबहादुर जैसा कवि हो सकता है।
विशिष्ट अतिथि डॉ एम पी सिंह ने कहा कि यह पुस्तक मानबहादुर सिंह के व्यक्तित्व व कृतित्व को बखूबी बयां करती है।मानबहादुर हिंदी के कई बड़े माने जाने वाले कवियों से बड़े कवि हैं।
केएनआई के पूर्व प्राचार्य प्रोफेसर राधेश्याम सिंह ने कहा कि हिन्दी कविताओं की राष्ट्रीय मुख्यधारा में मानबहादुर सिंह का नाम प्रमुख है। उनकी कविताओं के बिम्ब कहीं से भी केदारनाथ सिंह के बिम्बों से कमजोर नहीं है। मानबहादुर की कविताओं में सामंती संस्कृति का प्रतिरोध है ।
वरिष्ठ कवि मथुरा प्रसाद सिंह जटायु ने कहा कि इस पुस्तक में मान बहादुर सिंह के व्यक्तित्व कृतित्व के साथ साथ जनवाद के इतिहास पर भी महत्वपूर्ण बात की गई है।
राणा प्रताप स्नातकोत्तर महाविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर ज्ञानेन्द्र विक्रम सिंह रवि ने कहा कि मानबहादुर सिंह की रचनाओं में उपस्थित लोक तत्व ने ही उनको चर्चित कवि बनाया।
संत तुलसीदास पीजी कालेज के पूर्व संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉ सुशील कुमार पाण्डेय साहित्येन्दु ने कहा कि मानबहादुर सिंह की जन्मभूमि बरवारीपुर में उनकी मूर्ति लगनी चाहिए।
गनपत सहाय पीजी कालेज के पूर्व अंग्रेजी विभागाध्यक्ष डॉ धर्मपाल सिंह ने कहा कि जनकवि मानबहादुर सिंह पुस्तक के कथ्य महत्वपूर्ण हैं लेकिन भाषा लचर व वाक्य विन्यास गलत है इसपर लेखक को ध्यान देना होगा। अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार डॉ आद्या प्रसाद सिंह प्रदीप ने कहा कि मान बहादुर सिंह की कविताओं में अवध का गांव बोलता है।
स्वागत डॉ राम प्यारे प्रजापति आभार ज्ञापन कार्यक्रम संयोजक प्रधानाचार्य सुभाष चन्द्र यादव परदेसी तथा संचालन डॉ ओंकारनाथ द्विवेदी ने किया।
इस अवसर पर हनुमान प्रसाद सिंह अभिषेक,रेनू सिंह, पवन कुमार सिंह ,सुरेश चंद्र शर्मा,सर्वेशकांत वर्मा, सौरभ मिश्र,डॉ करुणेश भट्ट,हरिनाथ शुक्ल हरि, ग्राम प्रधान बेचूराम प्रजापति,पूर्व प्रधान मनोज कुमार सिंह, सीमा सिंह, नरेंद्र शुक्ल, अवनीश पाण्डेय, हरगोविंद सिंह , राज बहादुर राना आदि ने भी अपने विचार रखे।
संयोजक ने उपस्थित साहित्यकारों को अंगवस्त्र, स्मृति चिन्ह और पुष्प माला आदि भेंटकर सम्मानित किया।
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