बिहार वोटर लिस्ट रिवीजन पर सुप्रीम कोर्ट का रोक से इनकार
सुप्रीम कोर्ट ने बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पर रोक लगाने से इनकार किया और आधार, वोटर कार्ड, राशन कार्ड को दस्तावेजों में शामिल करने का सुझाव दिया. इस मामले में अगली सुनवाई 28 जुलाई को होगी.

पटना. बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सुप्रीम कोर्ट में 10 जुलाई 2025 को हुई सुनवाई ने सियासी हलचल तेज कर दी है. सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग की SIR प्रक्रिया पर रोक लगाने से इनकार किया. लेकिन, आधार कार्ड, वोटर कार्ड, और राशन कार्ड को दस्तावेजों की सूची में शामिल करने का सुझाव दिया. इस फैसले पर बिहार के डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा और RJD सांसद मनोज झा ने अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दीं. विजय सिन्हा ने इसे ‘विकसित भारत’ का प्रतीक बताया, जबकि RJD ने इसे ‘बिहार के करोड़ों मतदाताओं की जीत’ करार दिया.
विजय सिन्हा ने क्या कहा?
बिहार के डिप्टी सीएम विजय सिन्हा ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया. SIR जारी रहने के फैसले के बाद उन्होंने विपक्ष पर सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि यह संविधान विरोधी हैं और नहीं चाहते कि जेनुइन वोटर वोट दें और बाहर के वोटरों पर प्रतिबंध लगे. वे जंगल राज को बूथ से निकालना चाहते हैं. विजय सिन्हा का यह बड़ा बयान है. चुनाव आयोग की जिम्मेदारी बनती है कि जो लोग दो-दो आधार कार्ड और वोटर आईडी कार्ड बनवा चुके हैं, उनकी भी जांच होनी चाहिए कि उन्होंने गलत तरीके से यह कैसे बनवाए.
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