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यूपी के इस IPS को तीसरी बार मिलेगा राष्ट्रपति पदक

उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी अजय कुमार साहनी को उनकी बहादुरी के लिए राष्ट्रपति पदक से सम्मानित किया जाएगा. ये उनका तीसरा राष्ट्रपति पदक होगा.

UP IPS Ajay Kumar Sahni will get President Medal for his indomitable courage यूपी के इस IPS को तीसरी बार मिलेगा राष्ट्रपति पदक, कई कुख्यात अपराधियों को किया है ढेर

उत्तर प्रदेश के एनकाउंटर स्पेशलिस्ट और वरिष्ठ IPS अधिकारी अजय कुमार साहनी को उनकी बहादुरी के लिए राष्ट्रपति पदक से सम्मानित किया जाएगा. अजय कुमार यूपी कैडर के अधिकारी हैं और अपने अदम्य साहस के लिए जाने जाते हैं. अपनी सर्विस के दौरान उन्होंने कई अपराधियों को उनके सही ठिकानों पर पहुंचाया है.

2009 बैच के आईपीएस अधिकारी अजय कुमार साहनी इन दिनों बरेली जनपद में तैनात है. इससे पहले वो कई जनपदों में एसएसपी पद पर भी तैनात रह चुके हैं. अजय साहनी को एनकाउंटर स्पेशलिस्ट के तौर पर भी जाना जाता है. अपने करियर में उन्होंने 52 एनकाउंटर किए हैं, जिसमें कई बड़े अपराधियों को उन्होंने ढेर किया है.

राष्ट्रपति पद से किया जाएगा सम्मानित

अजय कुमार साहनी को अपनी बहादुरी के लिए इस साल राष्ट्रपति पदक से सम्मानित किया जाएगा. खास बात ये है कि ये उनके करियर का तीसरा राष्ट्रपति पदक है. इससे पहले उन्हें 26 जनवरी 2020 एक ख़तरनाक अपराधी का एनकाउंटर में बहादुरी दिखाने के लिए राष्ट्रपति पदक दिया गया था.

ये बात उस समय की है जब अजय साहनी मेरठ के एसएसपी हुआ करते थे. इस दौरान पुलिस को सूचना मिली कि मोटर साइकिल पर दो हथियारबंद बदमाश इलाके में सक्रिय हैं जिसके बाद उनकी घेराबंदी के लिए टीम बनाई गई है. साहनी उस टीम को लीड कर रहे थे. पुलिस को देखकर बदमाशों ने फायरिंग कर दी, जिसमें दो पुलिसकर्मी घायल हो गए थे.

एक गोली साहनी के क़रीब से होकर भी गुजरी लेकिन वो डरे नहीं और उन्होंने बदमाशों का पीछा करते हुए फायरिंग की. इस एनकाउंटर में कुख्यात नायडू गैंग का सरगाना शिव शक्ति नायडू घायल हो गया, जिसकी बाद में मौत हो गई. उस पर एक लाख रुपये का इनाम का घोषित थी. यूपी सरकार ने उनकी बहादुरी का दुर्लभ से दुर्लभतम बताया था.

इसके अलावा उन्हें सुजीत सिंह उर्फ बुढ़वा को भी मार गिराने के लिए सम्मानित किया गया है. बुढवा पर 50 हज़ार रुपये का इनाम घोषित था. साहनी ने पूर्वांचल के D-9 गैंग को खत्म किया. वहीं साल 2016 में सिद्धार्थनगर में तैनाती के दौरान उन्होंने बावरिया गैंग के भी कई सदस्यों को गिरफ्तार किया था. एक प्रतिष्ठित मैगजीन के सर्वे में उन्हें देश के शीर्ष 50 आईपीएस अधिकारियों में शामिल किया गया है.

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