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गुजरात विधानसभा का मानसून सत्र आज से, 10 सितंबर तक चलेगी कार्यवाही

गुजरात विधानसभा के मानसून सत्र की शुरुआत आज दो अहम बिल के साथ हो सकती है. जहां जन विश्वास विधेयक से छोटे उल्लंघनों पर जेल की जगह जुर्माने का प्रावधान होगा, वहीं जीएसटी संशोधन विधेयक से टैक्स व्यवस्था को केंद्र के अनुरूप बनाया जाएगा.गुजरात विधानसभा का मानसून सत्र आज से शुरू, पहले ही दिन पेश होंगे दो बड़े बिल

 गुजरात विधानसभा का मानसून सत्र आज, सोमवार से शुरू होने जा रहा है. वही, इस सत्र के पहले दिन की शुरुआत दो अहम बिल के साथ हो सकती है. साथ ही विधानसभा में, दिवंगत पूर्व मुख्यमंत्री विजय रुपाणी, जिनका जून में अहमदाबाद विमान हादसे में निधन हो गया था, उनको व अन्य दिवंगत व्यक्तियों को श्रद्धांजलि देने के लिए शोक प्रस्ताव भी पेश किए जाएंगे.

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य सरकार इस सत्र के पहले दिन जिन दो बिलों को टेबल करने जा रही है, उनमें गुजरात जन विश्वास (संशोधन प्रावधान) विधेयक, 2025 और गुजरात वस्तु एवं सेवा कर (दूसरा संशोधन) विधेयक, 2025 शामिल हैं.
सरकार क्यों ला रही जन विश्वास बिल? 

इनमें से गुजरात जन विश्वास विधेयक का मकसद राज्य के 11 अलग-अलग कानूनों में सुधार करना है. इसके तहत छोटे-छोटे नियमों के उल्लंघन पर जेल भेजने के बजाय अब केवल जुर्माना या आर्थिक दंड लगाया जाएगा. यह कदम कारोबार और उद्योग जगत के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है. इस बिल में जिन कानूनों को शामिल किया गया है, उनमें गुजरात इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट एक्ट, लेबर वेलफेयर फंड एक्ट, म्युनिसिपैलिटीज एक्ट, एपीएमसी एक्ट, घरेलू जल आपूर्ति अधिनियम, सहकारी समितियां अधिनियम, टाउन प्लानिंग अधिनियम, दुकान एवं प्रतिष्ठान अधिनियम और बिजली शुल्क अधिनियम जैसे कई कानून शामिल हैं.
क्या है गुजरात वस्तु एवं सेवा कर विधेयक, 2025 को लाने का मकसद?

वहीं, दूसरा बिल गुजरात वस्तु एवं सेवा कर (दूसरा संशोधन) विधेयक, 2025 है. इसका मकसद है जीएसटी काउंसिल की सिफारिशों को राज्य में लागू करना और गुजरात जीएसटी अधिनियम, 2017 को केंद्रीय जीएसटी अधिनियम, 2017 के साथ एकरूप बनाना. इससे पूरे देश में टैक्स व्यवस्था को समान बनाए रखने में मदद मिलेगी और राज्य भी केंद्र की टैक्स पॉलिसी के साथ तालमेल बैठा पाएगा.
दरअसल, कुल मिलाकर गुजरात विधानसभा के इस मानसून सत्र की शुरुआत आर्थिक और प्रशासनिक सुधारों से होगी. एक तरफ जन विश्वास विधेयक उद्योग और व्यापार जगत को राहत देगा, तो दूसरी ओर जीएसटी संशोधन बिल टैक्स व्यवस्था में एकरूपता सुनिश्चित करेगा.

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