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पश्चिम बंगाल की ममता सरकार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका, 20 लाख कर्मचारियों को 25% DA देने का आदेश

पश्चिम बंगाल सरकार और राज्य कर्मचारियों के बीच महंगाई भत्ता (DA) को लेकर चल रहे मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने 2008 से 2019 तक का बकाया महंगाई भत्ता दिए जाने का आदेश दिया है।

पश्चिम बंगाल की ममता सरकार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका, 25 लाख कर्मचारियों  को 25% DA देने का आदेश - India TV Hindiपश्चिम बंगाल सरकार और उसके कर्मचारियों के बीच लंबे समय से चल रहे महंगाई भत्ते (DA) के विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को करीब 20 लाख राज्य सरकारी कर्मचारियों को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया कि 2008 से 2019 तक की अवधि का DA बकाया भुगतान किया जाना चाहिए। अदालत ने कहा कि पहले के अंतरिम आदेश के अनुसार, बकाया राशि का कम से कम 25% 6 मार्च तक जारी किया जाना चाहिए।

समिति का गठन करने का आदेश

बेंच ने राज्य सरकार को बाकी 75 प्रतिशत DA पर फैसला करने के लिए चार सदस्यों की एक कमेटी बनाने का भी आदेश दिया। जानकारी के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार को कर्मचारियों को महंगाई भत्ता (DA) एक कानूनी अधिकार के तौर पर जारी करने का निर्देश दिया है, क्योंकि यह वेतन की गणना के लिए ROPA नियमों में शामिल है। 2009-19 तक का DA का बकाया कर्मचारियों को जारी किया जाए। इसमें शामिल वित्तीय प्रभावों को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व SC जस्टिस इंदु मल्होत्रा और दो रिटायर्ड HC चीफ जस्टिस के साथ CAG या CAG द्वारा नियुक्त एक वरिष्ठ अधिकारी की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया है। यह समिति बंगाल राज्य के कर्मचारियों को DA के भुगतान का निर्धारण करेगी।

कोर्ट ने तीन महीने के आदेश भुगतान करने का दिया था आरोप

इसी बेंच ने पिछले साल अगस्त में इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। पिछले साल 16 मई को पारित एक अंतरिम आदेश में, सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को अपने कर्मचारियों को तीन महीने के भीतर महंगाई भत्ते का 25 प्रतिशत भुगतान करने का निर्देश दिया था। बाद में ममता बनर्जी सरकार ने फंड की कमी का हवाला देते हुए सुप्रीम कोर्ट से डेडलाइन को छह महीने बढ़ाने की अपील की।

1 अप्रैल, 2025 से बंगाल सरकार के कर्मचारियों के लिए महंगाई भत्ता पिछले साल के राज्य बजट प्रस्तावों में मूल वेतन का 18 प्रतिशत तय किया गया था। केंद्र सरकार के कर्मचारियों और राज्य सरकार के कर्मचारियों के बीच यह अंतर लगभग 40 प्रतिशत है।

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