आसिम मुनीर साइडलाइन, कतर की एंट्री: होर्मुज डील पर ट्रंप को दोहा पर भरोसा
ईरान-अमेरिका बातचीत के बीच बड़ा मोड़ आया है. अब तक पाकिस्तान के जरिए चल रही बैकचैनल डिप्लोमेसी के बीच कतर की टीम सीधे तेहरान पहुंच गई, जिससे सवाल उठ रहे हैं कि क्या आसिम मुनीर की भूमिका कमजोर पड़ गई है? ट्रंप प्रशासन ने कतर को भी बातचीत में उतारकर नया दांव खेला है. यह दिखाता है कि पाकिस्तान पर उसे भरोसा नहीं रहा.
ईरान-अमेरिका युद्धविराम को लेकर चल रही बातचीत के बीच अब बड़ा कूटनीतिक ट्विस्ट सामने आया है. अब तक पाकिस्तान और उसके आर्मी चीफ फील्ड मार्शल आसिम मुनीर को इस बैकचैनल डिप्लोमेसी का बड़ा चेहरा बताया जा रहा था, लेकिन अब कतर की एंट्री ने पूरा समीकरण बदल दिया है. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, कतर की एक नेगोशिएशन टीम शुक्रवार को सीधे तेहरान पहुंची, जो अमेरिका के साथ समन्वय में ईरान से बातचीत कर रही है. इसका मकसद युद्ध खत्म कराने और बाकी अटके मुद्दों पर अंतिम डील की कोशिश करना बताया गया है. यानी जिस बातचीत में पाकिस्तान खुद को सबसे बड़ा तुर्रम खां बन रहा था, वहां अब ट्रंप प्रशासन ने कतर पर भी भरोसा दिखाकर नया चैनल खोल दिया है. अब तक पाकिस्तान कोई डील नहीं करा पाया है और यह दिखाता है कि अमेरिका खाड़ी के दूसरे पक्षों की भी मदद ले रहा है.
कतर की एंट्री क्यों अहम?
होर्मुज भी बना बड़ा अड़ंगा
बातचीत में सबसे बड़ा पेच सिर्फ परमाणु कार्यक्रम नहीं, बल्कि होर्मुज जलडमरूमध्य भी बना हुआ है. अमेरिका चाहता है कि यह समुद्री रास्ता पूरी तरह खुले, जबकि ईरान इसे अपनी रणनीतिक ताकत की तरह इस्तेमाल कर रहा है. मार्को रुबियो ने यहां तक कहा कि अगर ईरान रास्ता नहीं खोलता तो अमेरिका को ‘Plan B’ भी तैयार रखना होगा.
क्या आसिम मुनीर का रोल कमजोर पड़ गया?
पाकिस्तान क्या कह रहा है?
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि पाकिस्तान ने अब तक ‘अच्छा काम’ किया है, लेकिन साथ ही यह भी साफ कर दिया कि खाड़ी देशों के भी अपने हित हैं और अमेरिका सभी से बात कर रहा है. यानी बयान भले संतुलित रहा, लेकिन मैदान में कतर की एंट्री ने संकेत दे दिया कि पाकिस्तान अकेला गेम नहीं चला रहा.
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