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रुबियो कोलकाता से दिल्ली पहुंचे, PM मोदी से मुलाकात, एस. जयशंकर संग करेंगे बैठक

अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो 4 दिवसीय भारत यात्रा पर कोलकाता पहुंच गए. उनका यह विजिट ऐसे समय हो रहा है, जब ईरान जंग के चलते पूरी दुनिया विभिन्‍न तरह की दिक्‍कतों से जूझ रही है. रुबियो क्‍वाड के विदेश मंत्रियों की बैठक में भी शिरकत करेंगे. इसके अलावा द्विपक्षीय मुद्दों पर भी बातचीत होगी.चार दिवसीय भारत दौरे पर कोलकाता पहुंचे US विदेश मंत्री मार्को रुबियो, ऊर्जा  और क्वाड पर होगी अहम चर्चा - dainiktribuneonline.com

अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो (Marco Rubio) शनिवार 23 मई 2026 को अपने चार दिवसीय भारत दौरे की शुरुआत करते हुए कोलकाता पहुंचे. यह दौरा भारत-अमेरिका संबंधों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसमें व्यापार, प्रौद्योगिकी, रक्षा सहयोग, ऊर्जा सुरक्षा और क्वाड देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा होने वाली है.
करीब 14 वर्षों बाद किसी अमेरिकी विदेश मंत्री का कोलकाता दौरा हो रहा है. इससे पहले वर्ष 2012 में तत्कालीन अमेरिकी विदेश मंत्री Hillary Clinton ने शहर का दौरा किया था. ऐसे समय में रुबियो का आगमन राजनीतिक रूप से भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि हाल ही में पश्चिम बंगाल में भाजपा नेतृत्व वाली सरकार सत्ता में आई है. भारत में अमेरिकी राजदूत Sergio Gor ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर रुबियो के आगमन की जानकारी देते हुए कहा कि यह उनकी पहली भारत यात्रा है. उन्होंने बताया कि दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से नई दिल्ली में मुलाकात होगी, जिसमें व्यापार, टेक्नोलॉजी, रक्षा सहयोग और क्वाड समेत कई रणनीतिक विषयों पर चर्चा की जाएगी. रुबियो का भारत दौरा 23 से 26 मई तक प्रस्तावित है. इस दौरान वह कोलकाता के अलावा नई दिल्ली, आगरा और जयपुर भी जाएंगे. माना जा रहा है कि यात्रा के दौरान भारत और अमेरिका के बीच ऊर्जा सहयोग को और मजबूत करने पर विशेष जोर रहेगा.

कोलकाता से दिल्‍ली पहुंचे मार्को रुबियो, उनका भारत दौरा काफी अहम

अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio कोलकाता से दिल्‍ली पहुंच चुके हैं. उनकी भारत यात्रा को राजनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है. वॉशिंगटन में भारत समर्थक और चीन को लेकर सख्त रुख रखने वाले नेता के रूप में पहचाने जाने वाले रुबियो को केवल एक सामान्य राजनयिक दूत नहीं माना जाता. माना जा रहा है कि उनकी यह यात्रा इस संकेत के तौर पर देखी जाएगी कि पाकिस्तान के साथ हालिया अमेरिकी संपर्कों के बावजूद ट्रंप प्रशासन क्षेत्र में भारत को अपना बड़ा रणनीतिक साझेदार मानता है. विशेषज्ञों के मुताबिक, रुबियो की यात्रा भारत-अमेरिका संबंधों को नई मजबूती देने और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में साझा रणनीति को आगे बढ़ाने का संदेश भी है.

भारत-अमेरिका के बीच डिफेंस पार्टनरशिप पर फोकस

भारत और अमेरिका के बीच रक्षा साझेदारी को नई दिशा देने की तैयारी तेज हो गई है. अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग प्रमुख एजेंडा है. भारत की सैन्य क्षमताओं में पहले से ही अमेरिकी तकनीक की अहम भूमिका है. भारतीय वायुसेना और नौसेना बोइंग पी-8 पोसाइडन विमान, एमक्यू-9बी स्काईगार्डियन ड्रोन, एम777 हॉवित्जर तोप और बोइंग सी-17 ग्लोबमास्टर-III जैसे आधुनिक प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर रही हैं. हालांकि, बातचीत अब केवल रक्षा खरीद तक सीमित नहीं रह गई है. दोनों देश रक्षा प्रणालियों के को-प्रोडक्‍शन, एआई, सेमीकंडक्टर और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दे रहे हैं. माना जा रहा है कि यह साझेदारी हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक संतुलन और तकनीकी सहयोग को और मजबूत करेगी.

इन बातों पर रहेगा फोकस

दौरे से पहले मियामी में पत्रकारों से बातचीत में रुबियो ने कहा था कि अमेरिका भारत को जितनी अधिक एनर्जी (तेल, गैस) बेच सकेगा, उतना बेहतर होगा. उन्होंने कहा कि अमेरिका इस समय रिकॉर्ड स्तर पर ऊर्जा उत्पादन और निर्यात कर रहा है. भारत की ऊर्जा जरूरतों और वैश्विक तेल आपूर्ति पर होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति के प्रभाव से जुड़े सवाल पर उन्होंने भारत को महान साझेदार बताया. इस दौरे का सबसे अहम पड़ाव 26 मई को प्रस्तावित क्वाड देशों की बैठक मानी जा रही है. बैठक में भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्री हिस्सा लेंगे. इसमें भारतीय विदेश मंत्री S. Jaishankar मेजबानी करेंगे, जबकि ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री Penny Wong और जापान के विदेश मंत्री Motegi Toshimitsu भी शामिल होंगे.

मार्को रुबियो पत्‍नी के साथ कोलकाता से दिल्‍ली रवाना

कोलकाता से नई दिल्ली रवाना होने से पहले अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर अधिकारियों और एयरपोर्ट कर्मचारियों से मुलाकात की. उनके साथ उनकी पत्नी जीनेट डी. रुबियो भी मौजूद रहीं. रुबियो ने कर्मचारियों से बातचीत की और उनके साथ समूह फोटो भी खिंचवाई. कोलकाता दौरे के बाद अब वे नई दिल्ली में विभिन्न उच्चस्तरीय बैठकों में हिस्सा लेंगे. भारत यात्रा के दौरान अमेरिका और भारत के बीच रणनीतिक साझेदारी, इंडो-पैसिफिक सहयोग, रक्षा, ऊर्जा और व्यापार से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है

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