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जिला अस्पताल में सर्पदंश के इलाज के दावे अधूरे, 3 साल के मासूम की मौत

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जिला अस्पताल में सर्पदंश के इलाज के दावे खोखले ,गंभीर हालत के मरीजों को किया जाता है रिफर

●मण्डलायुक्त/जिलाधिकारी महोदया कृपया इस घटना का गम्भीरता से संज्ञान लीजिये

●जिला अस्पताल में सर्पदंश के इलाज के दावे अधूरे, गम्भीर हालत में बच्चे के परिजन ले गये प्राइवेट असप्ताल जहाँ इलाज के दौरान हुई 3 साल के मासूम की दुःखद मृत्यु

●जहाँ एक ओर सर्पदंश राज्य आपदा घोषित हो चुकी है वहीँ सर्पदंश रोगियों की समय से इलाज न मिलने पर हो रही मृत्यु

●स्नेक वाइट ट्रीटमेंट की अलग से एक ओपीडी व प्रशिक्षित चिकित्सक संग ही अन्य प्रशिक्षित स्टाफ की भी जिला अस्पताल में है बेहद आवश्यकता

●हमारी एक छोटी सी पहल से ये जनहानि अवश्य ही रुक सकती है

इटावा-ताजा मामला है जसवन्तनगर क्षेत्र के कटे खेड़ा के नगला करन का जहाँ से मिली जानकारी के अनुसार गुरुवार देर रात्रि सोते समय मात्र तीन साल के मासूम अपिश को किसी जहरीले सर्प ने दो से तीन बार काटा जिसके थोड़ी देर बाद वह नीला पड़ने लगा और उसे सांस लेने में भी जब परेशानी हुई, वह रोया और फिर उल्टियां करने लगा तब परिजन उसे लेकर जिला अस्पताल दौड़े वहाँ समय पर पहुंचने के वावजूद सर्पदंश की पहचान होने पर भी परिजनों के अनुसार बच्चे को साधारण उपचार देने के साथ कोई भी स्नेक एंटीवेनम इंजेक्शन नही लगाया गया। वहाँ लगभग एक घण्टा बर्बाद होने के बाद सैफई रिफर करने की बात कही गई तब परिजन बच्चे को लेकर नई मंडी रोड पर स्थित एक निजी बड़े अस्पताल में ले आये व एडमिट करा दिया। जहाँ पर उसे स्नेक बाइट का समुचित उपचार तो दिया गया लेकिन वहाँ के डॉ भी उस मासूम की जान नही बचा सके और शनिवार की रात लगभग 1 बजे उस सर्पदंश से पीड़ित बच्चे ने अंततः दम तोड़ दिया। अब इस घटना से एक बड़ा सवाल यह उठता है कि, योगी सरकार के सर्पदंश को राज्य आपदा घोषित करने के वावजूद भी जनपद के बड़े सरकारी अस्पताल में इलाज की मौजूदा स्थिति बेहद चिंतनीय है कि, जब एक से बढ़कर एक हाइटेक उपकरणों सहित करोङो के बजट से लैस होने के वावजूद एक अदद सर्पदंश का सही इलाज आम लोगों को मयस्सर नही हो पा रहा है तब ऐसे में सर्पदंश से पीड़ित मरीज व उसके परिजन जनपद में कहाँ जायें यह एक बड़ा सवाल है। अब वजह दो है या तो अस्पताल में सर्पदंश के इलाज के लिये कोई चिकित्सक या स्टाफ प्रशिक्षित ही नही है या वहाँ सर्पदंश के इलाज की अलग से कोई ओपीडी की व्यवस्था ही नही है। में इस घटना के माध्यम से जिलाधिकारी महोदया से में डॉ आशीष त्रिपाठी एक प्रशिक्षित सर्पविशेषज्ञ व सर्पमित्र होने के नाते निवेदन के साथ जनहित में यह माँग करता हूँ कि, कृपया जनपद के जिला अस्पताल में किसी भी प्रशिक्षित डॉक्टर या विशेष ड्यूटी स्टाफ द्वारा 24×7 एंटीवेनम की उपलब्धता मरीज को तत्काल उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें एवं इमरजेंसी में ऎसी कोई व्यवस्था केवल सर्पदंश के रोगियों के लिये ही अलग से लागू हो जिससे कि समय रहते ही उन्हें सही जगह पर उचित इलाज मिल सके। क्यों कि कोबरा या करैत के काटने के बाद इलाज के लिये मरीज का एक एक मिनट भी बेहद ही बेशकीमती होता है क्यों कि सर्प का खतरनाक न्यूरोटॉक्सिक वेनम (जहर) पीड़ित की तांत्रिका कोशिकाएं 15 से 20 मिनट में ही तेजी से नष्ट करने लगता है और वह सांस रुकने पर अनिश्चित समय के लिये अचेत भी हो जाता है या फिर ठीक होने पर कुछ आंशिक विकलांग भी हो जाते है । मरीज पल पल मरता ही रहता है। विदित हो कि, पिछले मई माह में ही विगत 23 मई 2021 को सराय एसर की रहने वाली राजनश्री नाम की महिला की भी खतरनाक स्पेक्टिकल कोबरा सर्प के काटने से दर्दनाक मौत हो चुकी है जिसे तुरंत 5 मिनट में जिला अस्पताल तो लाया गया था लेकिन उसे भी यहाँ इलाज के लिये मना कर दिया गया और किसी चिकित्सक द्वारा उसके पर्चे पर सैफई रिफर लिख दिया गया। तब उसे उसके परिजन उसके बचने की आशा में आईटीआई चौराहे पर स्थित एक प्राइवेट अस्पताल ले गये जहाँ सर्प दंश का इलाज ही मौजूद नही था तब उनके भी मना करने के बाद सैफई पीजीआई ले जाते समय वैदपुरा से पहले उस महिला ने तड़पते हुये दम तोड़ दिया। इसी तरह एक लगभग 15 वर्षीय बच्ची प्रिंसी निवासी नेवलगंज अछल्दा रामपुर जो करैत के सर्पदंश से पीड़ित है व इटावा जनपद के ही एक प्राइवेट अस्पताल में जिन्दगी व मौत से लड़ भी रही है उसकी भी हालत बेहद गम्भीर है उसे भी परिजनों के अनुसार उसे भी करैत सर्प ने ही काटा है। अछल्दा में ही नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर समय से उन्हें कोई इलाज नही मिला जव वे वहाँ गये तो वहाँ ताला बन्द मिला । आदरणीय महोदय/ महोदया जब बरसात के समय सर्पदंश की घटनाएं बढ़ रही है तब यदि ऐसे निश्चित बेहद कम समय मे समय से यदि किसी रोगी को सही इलाज ही नही मिलेगा तो सर्पदंश से होने वाली असमय मौतों में जनपद में यूँ ही बढोत्तरी होती ही रहेगी व राज्य सरकार के राजकोष (आपदाकोश) पर आर्थिक व्यय का अतिरिक्त भार भी यूँ ही बढ़ता रहेगा।जनहित में उचित से उचित कार्यवाही करने की कृपा करें जिससे कि सर्पदंश से होने वाली मौतों को कम किया जा सके।

रिपोर्टर-डॉ०राहुल तिवारी

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