विधार्थी दिवस, कहते है न कि ” मंजिल उन्हीं को मिलती है, जिनके सपनों में जान होती है, पंख से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है ”
रिपोर्ट- अनुज पाटकार
वो विधार्थी दिवस
कहते है न कि ” मंजिल उन्हीं को मिलती है, जिनके सपनों में जान होती है, पंख से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है ”
आज हमारे आदर्श और महान वैज्ञानिक तथा पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम आजाद का जन्म दिवस है
15 अक्टूबर 1931 को जन्मे मिसाइल मैन की उपाधि से विभूषित किए गए पूर्व राष्ट्रपति के जन्मदिन को राष्ट्र आज विश्व विधार्थी दिवस के रूप में मना रहा है
ऐसी ही एक ललक ऐसी ही एक दृढ़ इच्छा शक्ति जालौन नगर के एक छोटे से महज 7 साल के बालक में देखने को मिली जो जन्म से ही नेत्रहीन है लेकिन वह अपनी इस लाचारी को अपनी कमजोरी नही बनने देना चाहता है और अपने इरादों को इतना मजबूत किये है कि बड़ी से बड़ी उचाईयो को छूने का जज्बा अपने अंदर कायम किये है और पढ़ लिखकर आगे सफल होना चाहता है और पुलिस या आर्मी में जाकर देश सेवा करना चाहता है।
जालौन के एक छोटे से गांव भदवा के बेहद ही गरीब परिवार का रहने वाला ये बालक मंगल सिंह जन्मजात अंधा है लेकिन नेत्रहीन होने के बाद भी उसने हार नही मानी और स्कूल जाना शुरू कर दिया और स्कूल में मात्र सुनकर ही उसने 7 बर्ष की उम्र में ही गिनती,पाहाड़े,ओलम,अंग्रेजी के अक्षर सहित लोगो के नाम और अन्य चीजें सीख ली और अपने हम उम्र बच्चों से किसी भी प्रकार से पढ़ने में कम नही है और उसकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि वो एक बार जिस बात को सुन ले तो फिर उसको कभी नही भूलता उसके सामने आप कोई भी शिक्षण सम्बंधी बात एक बार मात्र बोल दो और उसको वो याद हो जाती है यहां तक कि वो अगर किसी व्यक्ति की आवाज एक बार भी सुन ले तो फिर उस व्यक्ति को महीनों बाद भी उसकी आवाज से पहिचान जाता है उसकी प्रतिभा का आलम यह है कि वो नेत्रहीन होने के बाद भी पुलिस फोर्स व जाकर देश सेवा का जज्बा रखता है लेकिन परिवार इतना गरीब और लाचार है कि वह चाह कर भी अपने बेटे को अच्छी शिक्षा नही दिला पा रहे है अगर इस परिवार को ओर बच्चे को सरकार से कुछ मदद मिल जाये तो निश्चित ही ये बालक एक नया कीर्तिमान लिख सकता है